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ताना बाना

इतिहास में आज: 15 नवंबर

15 नवंबर 1978 को आज ही के दिन मक्का से इंडोनेशिया ले जा रहा एक विमान श्रीलंका में हादसे का शिकार हो गया. इस दुर्घटना ने दुनिया भर के जांचकर्ताओं को उलझा कर रख दिया.

हादसे में 183 लोगों की मौत हुई. विमान के सभी यात्री मुस्लिम थे और वे हज कर मक्का से लौट रहे थे. यात्रियों को लाने के लिए इंडोनेशिया की गरुडा इंडोनेशियाई एयरवेज ने आईसलैंड के विमान डीसी-8 को किराये पर लिया था. जेद्दाह एयरपोर्ट से उड़ान भरने के बाद विमान को इंडोनेशिया के एयरपोर्ट पर उतरना था. लेकिन उससे पहले रास्ते में श्रीलंका के कोलंबो एयरपोर्ट पर जहाज को चालक दल बदलने और ईंधन भरने के लिए रुकना था. उड़ान के दौरान सबकुछ ठीक था. विमान कोलंबो एयरपोर्ट की तरफ बढ़ा लेकिन इसी बीच रबर और नारियल के खेतों में क्रैश हो गया.

हादसे के बाद जांच समिति बैठी, वॉयस और डेटा रिकॉर्ड्स से पता चला कि पायलट ने कई छोटी छोटी गलतियां की थीं जो काफी अहम थीं. जब विमान एयरपोर्ट के नजदीक था तो उसने कंट्रोल टॉवर को उसकी सूचना नहीं दी और उतरते वक्त ऊंचाई का सही आंकलन नहीं किया. रनवे के नजदीक आते समय विमान काफी तेजी से नीचे उतर रहा था. इस समय विमान की ऊंचाई नापने का यंत्र खतरे का संकेत दे सकता था लेकिन वह गलत तरीके से सेट किया गया था. यंत्र को 250 फुट की जगह 150 फुट पर सेट किया गया था. जब तक पायलट को कुछ समझ आता और वह लैंडिंग को रद्द करता बहुत देर हो चुकी थी. एयरपोर्ट से कुछ किलोमीटर पहले ही विमान नारियल के पेड़ों से टकरा गया और रबर के खेत में जा गिरा.

क्रैश होते ही आग का बड़ा गोला बन गया. आग को बुझाने के लिए पांच दमकल की गाड़ियों को भेजा गया. लेकिन दमकल कर्मचारी आग के नजदीक नहीं पहुंच पाए क्योंकि गाड़ियां वहां तक पहुंच नहीं पाईं. 173 यात्री और चालक दल के 8 सदस्यों की हादसे में मौत हो गई थी. 32 जख्मी हुए. यह चमत्कार ही माना जाता है कि कैबिन का अगला हिस्से आग की चपेट में नहीं आया और 42 लोग बच निकले.

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