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ताना बाना

इतिहास में आज: 13 जुलाई

13 जुलाई 2011 को भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई तिहरे बम धमाकों से दहल उठी थी. यह धमाका उस वक्त हुआ था जब लोग दफ्तरों से घर लौट रहे थे और बाजारों में हलचल थी.

13 जुलाई की शाम मुंबई के तीन इलाकों में सुनियोजित तरीके से बम धमाके किए गए थे. शाम 6.54 से लेकर 7.06 बजे तक धमाकों को अंजाम दिया गया. धमाके ऐसे समय हुए थे जब बाजारों में लोग खरीदारी में व्यस्त थे.

मुंबई के झवेरी बाजार, ओपेरा हाउस और दादर में आतंकियों ने धमाके को अंजाम दिया. झवेरी बाजार और ओपेरा हाउस सोना और हीरा कारोबार के केंद्र हैं. धमाके वहां ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के नीयत से किए गए थे. वहीं तीसरा धमाका दादर के बस शेल्टर पर किया गया. 15 मिनट के भीतर तीनों धमाकों को अंजाम दिया गया. बम धमाकों के बाद तीनों जगह अफरा तफरी का माहौल था लेकिन इन धमाकों से वहां मौजूद आम मुंबईकरों का हौसला कम नहीं हुआ. मुंबईकरों ने विस्फोट में घायल लोगों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने का काम किया. उस वक्त गृह मंत्री पी चिदंबरम ने इन धमाकों को समन्वित आतंकवादी हमला करार दिया, जबकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने इसे हिन्दुस्तान के दिल पर हमला कहा.

साल 2012 में मुंबई पुलिस ने इस केस में चार्जशीट दाखिल की थी. बम धमाके की जांच कर रहे महाराष्ट्र एटीएस को उस समय बड़ी कामयाबी मिली जब उसने धमाकों के लिए जिम्मेदार और इंडियन मुजाहिदीन के सह संस्थापक यासीन भटकल को गिरफ्तार किया. महाराष्ट्र पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते ने भटकल और उसके साथी असादुल्लाह अख्तर के खिलाफ इन धमाकों को लेकर 300 पन्नों का अनुपूरक आरोप पत्र दाखिल किया. वहीं भटकल ने पुलिस के सामने दर्ज अपने बयान में कहा कि उसने जो कुछ भी किया उस पर उसे गर्व है. इन तीनों धमाकों में 21 लोगों की मौत हुई थी और 141 लोग घायल हुए थे.

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