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ताना बाना

इतिहास में आजः 30 दिसंबर

30 दिसंबर 2006 को पूर्व इराकी शासक सद्दाम हुसैन को फांसी पर चढ़ाया गया. उन पर 1980 के दशक में दुजैल शहर के 148 शिया मुसलमानों की हत्या करवाने का आरोप था.

1982 में दुजैल के एक गुट ने उस वक्त इरान के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को मारने की कोशिश की थी. दुजैल शिया दावा पार्टी का गढ़ माना जाता था और उस वक्त वह सद्दाम हुसैन के शासन का विरोध कर रहे थे. सद्दाम हुसैन पर यह आरोप अमेरिकी सैनिकों द्वारा उनकी गिरफ्तारी के बाद लगे.

सितंबर 2001 के हमलों के बाद अमेरिका का रुख आक्रमक होता जा रहा था. उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का मानना था कि इराकी सरकार को गिराने की जरूरत है क्योंकि उसके पास खतरनाक हथियार हैं. बुश ने कहा कि इराकी सरकार ऐंथ्रैक्स, नंसों के लिए जहरीली गैस और परमाणु हथियार बना रहा है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए और संयुक्त राष्ट्र के हथियार जांचकर्ताओं को सद्दाम हुसैन ने इराक आने की इजाजत भी दी. अंतरराष्ट्रीय टीम को हथियार तो नहीं मिले लेकिन सद्दाम हुसैन की सरकार पर असहयोग के गंभीर आरोप लगे.

बुश ने 2003 में इराक पर हमले के आदेश दिए. अमेरिकी आक्रमण के कुछ ही हफ्तों बाद इराक की मूलभूत संरचना ढहने लगी और अमेरिकी सैनिकों ने देश के ज्यादातर हिस्से पर कब्जा कर लिया. 9 अप्रैल 2003 को बगदाद अमेरिका के नियंत्रण में आ गया, लेकिन सद्दाम का फिर भी पता नहीं चल पा रहा था. 14 दिसंबर 2003 को अमेरिका ने इस बात की पुष्टि की कि सद्दाम को एक दिन पहले गिरफ्तार कर लिया गया है. इराक में अमेरिकी प्रतिनिधि पॉल ब्रेमर ने इस सिलसिले में सद्दाम का वीडियो भी दिखाया.

हिरासत में रहने के करीब एक साल बाद सद्दाम पर औपचारिक आरोप लगाए गए और उन्हें दुजैल हत्याकांड का जिम्मेदार ठहराया गया. करीब एक साल की कार्रवाई के बाद 2006 नवंबर में सद्दाम हुसैन को फंासी की सजा सुनाई गई.

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