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ताना बाना

इतिहास में आजः 28 जनवरी

नासा के अंतरिक्ष अभियान को उस वक्त पहला झटका लगा था जब आज ही के दिन चैलेंजर नामक अंतरिक्ष शटल उड़ान भरते ही हादसे का शिकार हो गया. इस हादसे में सभी 7 अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई थी.

इंसान की अंतरिक्ष में उड़ान की कोशिशों को आज ही के दिन बड़ा झटका लगा था. 28 जनवरी 1986 को नासा का अंतरिक्ष शटल यान चैलेंजर हादसे का शिकार हुआ था. अमेरिकी समय के मुताबिक सुबह 11.38 मिनट पर चैलेंजर ने फ्लोरिडा के केप कैनेवेरल से उड़ान भरी थी. इस शटल यान में छह अंतरिक्ष यात्रियों के अलावा क्रिस्ट मैकऑलिफ भी सवार थीं. मैकऑलिफ पेशे से टीचर थीं और वह पहली अमेरिकी नागरिक बनने जा रही थीं, जो अंतरिक्ष की यात्रा करती. इस उड़ान को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग स्पेस सेंटर के पास मौजूद थे, जिसमें कई स्कूली बच्चे अपनी टीचर मैकऑलिफ और छह दूसरे अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में जाते देखने के लिए जमा हुए थे. चैलेंजर शटल उड़ान भरने के 73 सेकेंड बाद ही हादसे का शिकार हो गया और उसमें सवार सारे अंतरिक्ष यात्री मारे गए. मैकऑलिफ ने एक प्रतियोगिता जीतकर दूसरे अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अंतरिक्ष में जाने का मौका पाया था. लेकिन उनका सपना आग के गोलों के साथ जलकर खाक हो गया. स्पेस सेंटर के पास खड़े सैकड़ों लोग और टीवी पर सीधा प्रसारण देख रहे लाखों लोग इस हादसे के गवाह बने.

इस हादसे के बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रोनॉल्ड रीगन ने एक विशेष आयोग का गठन किया. आयोग को यह पता लगाना था कि चैलेंजर के साथ आखिर क्या हुआ और कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचने के लिए क्या सुधार किए जाने चाहिए.

जांच में पता चला कि यान में लगे सॉलिड ईंधन रॉकेट की "ओ रिंग" सील के काम नहीं कर पाने के कारण विस्फोट हुआ. इस हादसे से नासा की साख पर गहरा आघात हुआ. इसकी भरपाई के लिए एंडेवर नाम के अंतरिक्ष शटल को प्रक्षेपित किया गया. उसके 17 साल बाद 1 फरवरी 2003 को ऐसा ही एक हादसा और हुआ. इस दिन कोलंबिया अंतरिक्ष शटल के ध्वस्त होने से एक बार फिर नासा को गहरा झटका लगा. इस हादसे से भारत में भी शोक की लहर फैल गई क्योंकि इस दुर्घटना में भारतीय मूल की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का भी निधन हो गया.

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