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ताना बाना

इतिहास में आजः 17 मई

एक नामुमकिन लगने वाली दूरी नापने की शुरुआत आज ही के दिन 1970 में थोर हेयरडाल ने अपनी नाव रा द्वितीय के साथ की थी.

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इस नाव की खासियत यह थी कि यह पैपिरस यानी नील घास के तने से बनी थी जैसा कि यहां तस्वीर में दिखाई दे रहा है, जिससे उन्होंने अटलांटिक महासागर की यात्रा की. 1969 में हेयरडाल ने प्राचीन मिस्र की ड्रॉइंग के आधार पर इथियोपिया के कारीगरों से नाव रा बनवाई और उसे अटलांटिक महासागर में उतारा. लेकिन कुछ ही हफ्तों में इसमें पानी भर जाने के कारण वह फटने लगी और आगे नहीं जा सकी. हेयरडाल ने हिम्मत नहीं हारी और अगले साल दोबारा ऐसी ही नाव बनवाई जिसका नाम रा द्वितीय था. इस बार कामयाबी उनसे दूर ना रही. उन्होंने अपने साथियों के साथ 17 मई 1970 को मोरक्को से यात्रा की शुरुआत की और अटलांटिक महासागर को 57 दिनों में पार कर लिया. नाव का अटलांटिक महासागर पार कर बारबाडोस पहुंचना दूसरे लोगों के लिए भी प्रेरणा स्रोत साबित हुआ. इससे साबित हो गया कि प्राचीन तौर तरीकों से जीवन गुजार रहे देश भी एक दूसरे से संपर्क में रह सकते हैं और यह असंभव नहीं है. उनकी इस यात्रा के बारे में किताब भी छपी और 1972 में इस पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनी. अपनी इस यात्रा के दौरान हेयरडाल ने रास्ते में समुद्र में हो रहे प्रदूषण से संबंधित नमूने भी इकट्ठे किए और उनसे संयुक्त राष्ट्र को अवगत कराया. ये नमूने संयुक्त राष्ट्र की 1972 में स्टॉकहोम में हुई पर्यावरण कांफ्रेंस में मददगार साबित हुए.

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