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ताना बाना

इतिहास में आजः 12 सितंबर

पृथ्वी से बाहर ब्रह्मांड को टटोलने की इंसानी चाहत के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है. 1959 में इसी दिन सोवियत संघ का रॉकेट 'लूकिन 2' चांद पर पहुंचा.

लूनिक 2 जैसे ही चांद पर लैंड हुआ, वैसे ही टक्कर की वजह उसमें रेडियो सिग्नल देने वाले सारे यंत्र खराब हो गए. लैंडिंग भी तय समय से एक मिनट 24 सेकेंड देर से हुई. मॉस्को प्लैनेटेरियम में हजारों लोग लूनिक 2 को देखने आए. वहां खास दर्शकों के लिए 15 टेलीस्कोप लगाए गए थे.

लूनिक का वजन करीब 400 किलो था और चांद तक पहुंचने में उसे करीब 36 घंटे लगे. रूस ने इससे पहले लूनिक 1 भेजा था लेकिन वह चांद जाने के बजाय अंतरिक्ष में खो गया. लूनिक 2 में धरती और चांद के गुरुत्वाकर्षण को माप करने के उपकरण लगे थे और उसके लॉन्च के लिए खास मल्टीस्टेज रॉकेट का इस्तेमाल किया गया.

रूस ने इस मौके पर खास तौर से कहा कि वह चांद पर पहुंचने वाला पहला देश तो है लेकिन वह चांद की सतह पर अपना हक नहीं जमाना चाहता. उस वक्त रूस के वैज्ञानिक प्रोफेसर आलेक्सांडर तोपचियेव ने कहा कि चांद पर मनुष्य का जाना उन्हें "बेहद मुश्किल" लग रहा है.लेकिन दो ही साल बाद 12 अप्रैल 1961 में रूस के ही यूरी गागारिन अंतरिक्ष पहुंचने वाले पहले मनुष्य बने.

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