इतिहास में आजः दो अप्रैल | ताना बाना | DW | 01.04.2014
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

ताना बाना

इतिहास में आजः दो अप्रैल

आज ही के दिन पोप जॉन पॉल द्वितीय का वैटिकन में निधन हुआ था. 1978 में पोप बने जॉन पॉल द्वितीय पिछले 400 सालों में पोप बनने वाले पहले गैर इतालवी नागरिक थे.

पोप जॉन पोल द्वितीय का असल नाम कैरोल वॉयतिला था. पोप जॉन पॉल द्वितीय एक ऐसे पोप थे जिन्होंने दुनिया के सबसे अधिक देशों का दौरा किया था. जॉन पॉल द्वितीय 1978 में पोप बनाए गए. लगभग 400 साल के बाद वह पहले पोप थे, जो इटली नहीं बल्कि पोलैंड से थे. वह 27 साल पोप रहे. इस दौरान उन्होंने इस्लाम और यहूदी धर्म के साथ संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश की और कैथोलिक चर्च की गलतियों के लिए माफी मांगी. अपने कार्यकाल में उन्होंने कई देशों की यात्रा की और चर्च को एक नया चेहरा दिया.

पोप जॉन पॉल द्वितीय का जन्म पोलैंड के क्राकोव शहर के पास 1920 को हुआ था. स्कूल की पढ़ाई के बाद उन्होंने क्राकोव की यागीलोनियन यूनिवर्सिटी से दर्शन शास्त्र और साहित्य की पढ़ाई की. उन्होंने रंगमंच में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. 1941 में नाजियों ने क्राकोव पर कब्जा कर लिया और यूनिवर्सिटी को बंद कर दिया. 1941 तक पोप के परिवार के सभी सदस्यों की मौत हो गई और वे अकेले बच गए. 1942 में युद्ध के खत्म होने के बाद वे यागीलोनियन में वापस लौटकर धर्मशास्त्र की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने दो डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की. 38 साल की उम्र में उन्हें आर्चबिशप बनाया गया. समय के साथ पोप जॉन पॉल द्वतीय ने धार्मिक आजादी जैसे विषयों पर अपने विचार दुनिया के सामने रखे. आर्चबिशप के तौर पर उनका सम्मान तो था मगर वैटिकन से बाहर उन्हें लोग कम ही जानते थे और शायद ही किसी को उम्मीद थी वह पोप जॉन पॉल के उत्तराधिकारी बनेंगे जो केवल 33 दिनों के कार्यकाल के बाद चल बसे थे. इसके बाद रोम स्थित सिस्टीन चैपल के कार्डिनलों ने दो दिन की बैठक के बाद कैरोल वॉयतिला को नया पोप चुना जिसके बाद उन्होंने पोप जॉन पॉल द्वितीय नाम अपनाया. 1981 में पोप जॉन पॉल द्वितीय को जान से मारने की कोशिश की गई लेकिन वे बच गए. 2 अप्रैल 2005 में उनकी मौत पार्किन्संस बीमारी से हुई.

DW.COM

संबंधित सामग्री