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खेल

"इतनी परवाह होती तो वनडे न छोड़ता"

सचिन तेंदुलकर रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बनाते जाते हैं और कहते जाते हैं कि रिकॉर्ड उनके लिए अहम नहीं हैं. 50वां टेस्ट शतक पूरा करने के बाद उन्होंने अपनी बात पर जोर देने के लिए एक और दलील दी.

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सचिन से जब मीडिया ने नए रिकॉर्ड के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, "मैं कभी रिकॉर्ड के बारे में नहीं सोचता. मेरा पूरा ध्यान अपनी तैयारियों पर और मैदान में जाकर सौ फीसदी प्रदर्शन करने पर होता है. मुझे खेलना अच्छा लगता है. बेहतर होना अच्छा लगता है. अगर मुझे रिकॉर्ड की परवाह होती तो मैं कुछ वनडे मैचों को न छोड़ देता. मुझे लगता है कि जब भी मैदान पर आऊं, अच्छा खेलूं."

अपने ऐतिहासिक 50वें टेस्ट शतक के बारे में सचिन बेहद खुश हैं. वह कहते हैं, "ऐसे हालात में रन बनाना हमेशा अच्छा लगता है. हम सब जानते हैं कि पहले दिन विकेट कैसी थी. मैं कोई बहाना नहीं बनाना चाहता लेकिन पहले दिन विकेट अलग थी. दूसरी पारी में हमारे लिए अच्छी बैटिंग करना बहुत जरूरी था. हमें संदेश देना था कि हम वापस आकर लड़ सकते हैं. और शायद हमने यह कर दिया है."

मैच में भारत की हालत ऐसी खस्ता थी और सचिन की पारी ने उसे संभाला. लेकिन सचिन इस पारी को सबसे मुश्किल नहीं मानते. उनके लिए आज भी 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ खेली 136 रन की पारी सबसे मुश्किल है. वह कहते हैं, "मेरे ख्याल से पाकिस्तान के खिलाफ चेन्नई में जो 136 रन बनाए थे, वह सबसे मुश्किल थी. विकेट लगातार खराब हो रही थी और गेंदबाजी बहुत अच्छी थी."

सचिन ने 50वें शतक के लिए अपने बैट की भी तारीफ की जिसे वह पिछले एक साल से इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "आमतौर पर एक बैट इतने दिन तक नहीं चलता. एक नीची गेंद आ जाए तो आपका बैट दो टुकड़ों में टूट सकता है. लेकिन इस बैट की जहां तक बात है तो मैं भाग्यशाली रहा हूं. मैं इसे बहुत दिनों से इस्तेमाल कर रहा हूं और अब इसकी हालत अच्छी नहीं है. मेरे पास कई बैट हैं लेकिन जैसे ही मैं इस बैट को उठाता हूं मुझे लगता है कि कोई मुझे आउट नहीं कर सकता."

सचिन ने इसी बैट के साथ 12 शतक बनाए हैं जिनमें वनडे की पहली डबल सेंचुरी भी शामिल है.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ए कुमार

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