1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

मनोरंजन

इतना सम्मान मॉरीशस में नहीं: अभिमन्यु अनत

भारत की साहित्य अकादमी के महत्तर सदस्य बनाए जाने पर मॉरीशस के जाने-माने हिन्दी लेखक अभिमन्यु अनत का कहना है कि इतना सम्मान तो उन्हें अपने देश में भी नहीं मिला.

सतत्तर-वर्षीय अभिमन्यु अनत ने उपन्यास, कहानी, कविता, नाटक और यात्रा वृत्तान्त, अनेक विधाओं में लिखा है. उनके चौबीस उपन्यास, पांच कहानी संग्रह, चार नाटक, तीन कविता संग्रह और एक यात्रा वृत्तान्त प्रकाशित हो चुके हैं. पिछले सप्ताह भारत की साहित्य अकादमी ने नयी दिल्ली में एक समारोह आयोजित कर मॉरीशस के प्रसिद्ध हिन्दी लेखक अभिमन्यु अनत को अपनी महत्तर सदस्यता से अलंकृत किया. भारत में साहित्य के लिए दिया जाने वाला यह सर्वोच्च सम्मान है और किसी भी समय साहित्य अकादमी के 21 से अधिक महत्तर सदस्य नहीं हो सकते. इस अवसर पर उनसे हुई बातचीत के कुछ प्रासंगिक अंश:

डॉयचे वेले: साहित्य अकादेमी का महत्तर सदस्य बनाना किसी भी साहित्यकार के लिए गौरव की बात है. यह सम्मान पाकर कैसा लग रहा है?

अभिमन्यु अनत: बहुत अच्छा लग रहा है. इतना सम्मान तो मुझे अपने देश मॉरीशस में भी नहीं मिला. वास्तव में यह हिन्दी का सम्मान है. यूं मैं जब भी भारत आता हूं, मुझे यहां के लोग बहुत प्यार और इज्जत देते हैं. हिन्दी भारत और मॉरीशस के बीच की एक कड़ी है.

आप एक श्रेष्ठ लेखक तो हैं ही, लेकिन इसके अलावा आप मॉरीशस में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के काम में भी अनेक दशकों से सक्रिय रहे हैं. आज वहां हिन्दी की क्या स्थिति है?

DW.COM

मॉरीशस में हिन्दी के प्रचार का काम बहुत पहले से शुरू हो गया था. पंडित विष्णु दयाल जी, जो हमारे ही इलाके के थे, उन्होंने इसमें अग्रणी भूमिका निभाई. उन्होंने मिशन की भावना के साथ हिन्दी में बोलने, लिखने का अभियान चलाया. मॉरीशस में तो क्रियोली बोली जाती है, लेकिन उत्तर भारत से गए हुए लोग अधिकतर हिन्दी ही बोलते हैं, चाहे वे हिन्दू हों या मुसलमान और कोई और भी हों. यही कारण है कि हमारे देश में भाषा को लेकर कभी कोई झगड़ा नहीं होता है क्योंकि सभी एक-दूसरे के साथ बात करने और संवाद करने में विश्वास रखते हैं. यूं भी मॉरीशस इतना खूबसूरत देश है कि मुझे एक विद्वान की कही बात याद आ रही है कि भगवान ने सबसे पहले मॉरीशस को बनाया और उसके बाद उसी की नकल करते हुए बाकी पृथ्वी के सुंदर स्थानों को रचा.

हमारे देश में हिन्दी बहुत अधिक बोली जाती है. उर्दू बोलने वाले भी हैं जो कभी हिन्दी तो कभी उर्दू बोलते हैं. लेकिन हमारे यहां हिन्दी-उर्दू का कोई झगड़ा नहीं है, न ही किसी और भाषा का है. हमारे यहां तमिल, तेलुगु, मराठी आदि भाषाएं बोलने वाले भी हैं, लेकिन इन सबमें हिन्दी ही सबसे अधिक बोली जाती है. शासन की भाषा तो फ्रेंच है और क्रियोली एक खिचड़ी भाषा है. मेरे दादा-दादी, नाना-नानी वगैरह 1870 के दशक में मॉरीशस गए थे. तभी से हिन्दी का प्रचार-प्रसार जारी है. पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की तरह ही भारत के अन्य भागों से भी जो लोग मॉरीशस आए, उन सबने यहां अपनी-अपनी भाषा और संस्कृति को बरकरार रखा जोकि बहुत बड़ी बात है. हमारी भाषा वैसे भोजपुरी है. आपस में हम भोजपुरी में बात करते हैं और दूसरों से क्रियोली में. लेकिन हमारी भोजपुरी या हिन्दी में क्रियोली के शब्द भी आ जाते हैं, जबकि अन्य भाषाभाषियों ने, जैसे मराठीभाषी लोगों ने, अपनी भाषा की शुद्धता को अधिक बनाए रखा है.

साहित्य की दृष्टि से मॉरीशस में हिन्दी की क्या स्थिति है? भारत के कौन से हिन्दी लेखक अधिक लोकप्रिय हैं?

भारत के सभी अच्छे हिन्दी लेखक मॉरीशस में लोकप्रिय हैं. वहां हिन्दी खूब बोली, लिखी और पढ़ी जाती है. बहुत सारे लेखक हैं जो हिन्दी में लिखते हैं. हमने भारत से बहुत कुछ सीखा है, और भारत भी हमसे कुछ सीख सकता है. मसलन भाषा के लिए लड़ने-झगड़ने से दूर रहना और सभी भाषाओं का सम्मान करना. भारत और मॉरीशस का संबंध इतना घनिष्ठ है कि हमारे देश में कोई भी भारत को गाली नहीं दे सकता है. मॉरीशस भारत नहीं है और न बनना चाहता है, लेकिन भारतीयता उसके साथ ऐसी जुड़ गयी है कि वह कभी छूट नहीं सकती.

इंटरव्यू: कुलदीप कुमार

संपादन: ईशा भाटिया


DW.COM

संबंधित सामग्री