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दुनिया

इटली से हेलिकॉप्टर सौदा रद्द

भारत ने इटली के साथ भ्रष्टाचार और दलाली के आरोपों में घिरे हेलिकॉप्टर सौदे को रद्द कर दिया है. प्रमुख शख्सियतों के लिए इस कंपनी से 3500 करोड़ रुपये के आधुनिक हेलिकॉप्टर खरीदे जाने थे.

भारत की समाचार एजेंसी पीटीआई ने रक्षा सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि रक्षा मंत्री एके एंटनी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ खास बैठक की, जिसके बाद इस सौदे को रद्द करने का फैसला किया गया. हालांकि आधिकारिक तौर पर इसका बयान जारी नहीं किया गया है. भारत में इस साल आम चुनाव होने हैं और केंद्र सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में बुरी तरह घिरी है.

आगस्टा वेस्टलैंड के साथ 2010 में करार हुआ था, जिसके तहत भारत को 12 हेलिकॉप्टर खरीदने थे. इनका इस्तेमाल वीआईपी लोगों के लिए होना था. लेकिन सौदेबाजी में वरिष्ठ अफसरों को दलाली और घूस देने की रिपोर्टों के सामने आने के बाद पिछले साल इसे सस्पेंड कर दिया गया था. इतालवी वकीलों का दावा है कि डील पर मुहर के लिए भारतीय अफसरों को सौदे का करीब 10 फीसदी हिस्सा घूस के तौर पर दिया गया है.

भारत और इटली के बीच का मामला वैसे भी यूपीए सरकार के लिए संवेदनशील रहता है क्योंकि कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी इतालवी मूल की हैं और ऐसे मौकों पर विपक्ष को उन पर निशाना साधने का अवसर मिल जाता है. हालांकि भारत ने तीन हेलिकॉप्टर हासिल कर लिए हैं पर रक्षा मंत्री एंटनी ने बाकी के नौ हेलिकॉप्टरों को रोक दिया है.

फैसला ऐसे वक्त में लिया गया है, जब भारतीय अधिकारी गीडो राल्फ हाशके से पूछताछ करने वाले हैं. समझा जाता है कि हाशके उन दलालों में शामिल है, जिन्होंने इस सौदे को कराया है. इस मामले में हाशके के खिलाफ इतालवी अदालत में भी मामला चल रहा है. आरोप है कि सौदे पर सहमति से दो साल पहले यानी 2008 में ही इन बातों को तय कर लिया गया था कि किसे कितने पैसे की रिश्वत देनी है.

भारत में सीबीआई समांतर जांच कर रही है. इसमें भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल एसपी त्यागी और 14 दूसरे लोगों नामजद है. आगस्टा वेस्टलैंड दरअसल इतालवी कंपनी फिनमेचानिका की ब्रिटेन स्थित इकाई है. खास बात यह है कि सिर्फ तीन हेलिकॉप्टरों की डिलीवरी के बावजूद कंपनी को कुल सौदे की 45 फीसदी रकम अदा कर दी गई है. हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और दूसरे अति विशिष्ट लोगों के लिए किया जाना है.

पिछले साल नवंबर में कानून मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय को सलाह दी थी कि इस सौदे में "निश्चित तौर पर धांधली" हुई है, जिसके बाद इसके रद्द होने का अनुमान लगाया जा रहा था.

एजेए/एमजे (एएफपी, पीटीआई)

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