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विज्ञान

इंडोनेशिया में कानून की आड़ में उजड़ते जंगल

इंडोनेशिया के बोर्नियो द्वीप के जंगलों में लकड़ी व्यापारी आरी से पेड़ों को गिरा कर तनों पर क्रम संख्या डाल देते हैं. सरकार उन्हें कानूनी सर्टिफिकेट भी दे रही है. लेकिन असल मामला कुछ और ही है.

पश्चिमी देशों के दबाव में इंडोनेशिया में सरकार पेड़ों की गैर कानूनी कटाई की रोकथाम करने की कोशिश कर रही है. सितंबर में यूरोपीय संघ के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर के बाद सरकार ने एक नया रास्ता निकाला है. जिन कंपनियों के पास परमिट है उन्हें सरकार कानूनी दायरों के तहत पेड़ों की कटाई का सर्टिफिकेट दे रही है ताकि वे उसे अपने विदेशी ग्राहकों को दिखा सकें.

यूरोपीय संघ को लकड़ी निर्यात करने वाले एशियाई देशों में इंडोनेशिया सबसे आगे हैं. उसे उम्मीद है कि इस नीति पर चलने से आने वाले समय में लकड़ी के उत्पाद यूरोपीय संघ को निर्यात करने में और फायदा मिलेगा. इंडोनेशिया के कारोबारी एक साल में करीब दो अरब डॉलर की लकड़ी निर्यात करने की उम्मीद कर रहे हैं.

हालांकि कई आलोचकों का कहना है कि पेड़ों की कटाई का परमिट यहां अक्सर गैर कानूनी तरीकों से हासिल किया जाता है. यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में पास किए गए इस कानून में उपभोक्ता को पाप बोध से मुक्त रखने की कोशिश की गई है, जबकि इससे जुड़े कई काम तो मेज के नीचे से हो रहे हैं.

मानव अधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट 'द डार्क साइड ऑफ ग्रीन ग्रोथ' लिखने वाली एमिली हार्वेल कहती हैं, "तंत्र बस आपसे यह सवाल करता है कि क्या आपके पास परमिट है. इसका मतलब यह है कि कोई भी काम जो सरकार कर रही है वह कानूनी है. यह खामोशी से किया जाने वाला भ्रष्टाचार है."

इंडोनेशिया में तेजी से जंगल घटते जा रहे हैं. नवंबर में गूगल अर्थ के जारी किए हुए एक नक्शे के अनुसार बीस हजार वर्ग किलोमीटर जंगल हर साल खत्म हो रहे हैं, जो कि हर रोज दस हजार फुटबॉल के मैदानों के बराबर है.

परमिट के लिए रिश्वत

इंडनेशिया का वन मंत्रालय देश का सबसे भ्रष्ट विभाग माना जाता है. 2012 में देश के 'करप्शन इरैडिकेशन कमीशन' के सर्वे में पाया गया कि ये परमिट अधिकारियों को रिश्वत खिलाकर हासिल किए जा रहे हैं.

इंडोनेशिया की लकड़ी सप्लायर कंपनियों को परमिट पाने से पहले सख्त कानूनी दिशानिर्देशों की कसौटी पर खरा उतरना होता है, जैसे कि पर्यावरण पर इससे होने वाले असर की जांच और पेड़ काटने से प्रभावित होने वाले समुदायों के साथ बातचीत. लेकिन यह सब किए बगैर ही इन कंपनियों को परमिट मिल जाते हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार सिर्फ 16 फीसदी मामलों में ही स्थानीय समुदायों से बात की गई है.

कानून व्यवस्था ढीली ही नहीं बल्कि खुद कानून के रखवाले भी इस घपले में शामिल हैं. पिछले साल मई में पुलिस अधिकारी लाबोरा सिटोरस डेढ़ करोड़ डॉलर की कीमत वाले गैर कानूनी लकड़ी के लट्ठों के साथ पूर्वी पापुआ क्षेत्र में पकड़े गए.

हार्वेल जैसे आलोचकों का मानना है कि इंडोनेशिया में लकड़ी के व्यापार से संबंधित कानूनी व्यवस्था के होते हुए भी यह संभव है कि जो माल विदेशों में कानूनी होने की मुहर के साथ जा रहा है वह गैरकानूनी हो.

खुद वन मंत्रालय मानता है कि सुधार की गुंजाइश है. लेकिन तब तक कुछ नहीं किया जा सकता जब तक यूरोपीय संघ से मंजूरी नहीं मिल जाती. मंत्रालय के वन्य उत्पादों की तैयारी और उनकी मार्केटिंग के मामलों के महानिदेशक द्वी सुधारतो ने कहा, "हम फिलहाल इसके लिए मसौदा तैयार कर रहे हैं. हम गैर सरकारी संगठनों से प्रस्तावों का भी स्वागत करते हैं ताकि हम यह तय कर सकें कि हमारे उत्पाद पूरी तरह कानूनी हैं."

एसएफ/एमजे (एएफपी)

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