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दुनिया

इंटरनेट से घबराती सरकारें

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के लिए ईरान और चीन इस साल इंटरनेट के दुश्मन देशों में शामिल हैं. इन देशों के ब्लॉगरों ने डॉयचे वेले से बातचीत के दौरान सेंसर के बारे में बताया.

पहले की ही तरह तानाशाही सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि उनके देशों में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों को काबू किया जाए. मानवाधिकार संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर ने इंटरनेट सेंसर विरोध दिवस के मौके पर ऐसे देशों की सूची जारी की जहां इंटरनेट पर सरकार की कैंची चलती है. इनमें बहरीन, चीन, ईरान, सीरिया और वियतनाम शामिल हैं. संगठन के मुताबिक इन देशों में इंटरनेट यूजर्स पर सरकार की नजर लगी रहती है, इतना ही नहीं समाचारों पर सरकारी लगाम बहुत कसी है. रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के मुताबिक, "सेंसर और निगरानी बढ़ती जा रही है और इस मूल भावना को खतरे में डालती है कि इंटरनेट आजादी की, सूचना के लेन देन की और अलग अलग विचारों को पेश करने की ऐसी जगह है जो सीमाओं को खत्म करती है."

काला धब्बा

चीन में इस समय समाचार और सूचना की दुनिया से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है. मानवाधिकार संगठन के मुताबिक चीन में 30 पत्रकारों और 60 ऑनलाइन कार्यकर्ताओं को जेल में डाला हुआ है. चीन की सरकार निगरानी, सेंसर और फिल्टर पर काफी समय खर्च करती है ताकि संवेदनशील सूचना बाहर न जा सके.

चीन के पत्रकार और संचार मामलों के विशेषज्ञ हू योंग कहते हैं कि चीन की एक्टिविजम और विचारों की आजादी के खिलाफ कथित ग्रेट फायरवॉल के बावजूद एक क्रांति हो रही है, "इंटरएक्टिविटी की दुनिया में यह (क्रांति) यूजर्स लाए हैं. कई फोरम, वीडियो प्लेटफॉर्म, सोशल नेटवर्क, ब्लॉग्स और माइक्रो ब्लॉग्स हैं. हू इस साल बॉब्स की जूरी में भी शामिल हैं.

हू कहते हैं, माइक्रोब्लॉगिंग के जरिए पहले तो कई लाख चीनी लोगों के लिए संभव हुआ है कि बिना किसी तानाशाही और प्रपोगैंडा के बावजूद वह अपनी बात रख सकें. फिर भी बार बार इंटरनेट कनेक्शन टूट जाता है, ब्लॉक कर दिया जाता है. यह बाहर से होता है और इसे रोकना मुश्किल है. नेट के जरिए खबरें तेजी से फैलती हैं और माइक्रोब्लॉगरों के कारण दुनिया को चीन के बारे में ज्यादा जानकारी मिलती है."

इंटरनेट है दुश्मन

ईरान में भी इंटरनेट कई साल से निगरानी और सेंसर का शिकार है. अब एक हलाल इंटरनेट बनाने की कोशिश की जा रही है साफ सुथरा इंटरनेट, जहां पूरा नियंत्रण सरकार का होगा. इंट्रानेट के जरिए ही वहां इंटरनेट के किसी पेज पर जा सकते हैं. इस तरीके से ईरान अपनी जनता को पूरी दुनिया से काटना चाहता है. रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स का कहना है कि ईरान में इंटरनेट पर दूसरे देशों की तुलना में बहुत कम राजनीतिक जानकारी मिलती है. इस पर कड़ा ध्यान रखा जाता है. संगठन के मुताबिक कई लेखों को अचानक राजनीतिक करार दे दिया जाता है. अक्सर फैशन, किचन या संगीत से जुड़ी जानकारी भी उसी तरह रोक दी जाती है जैसे विपक्ष के पेज या समाचार.

अराश अबादपोर ईरानी ब्लॉगर हैं जो निर्वासन में कनाडा में रहते हैं. वह भी बॉब्स की जूरी में हैं. उनका मानना है कि तेहरान की सरकार डरती है. इसलिए वह हमेशा कोशिश करती है कि यह छोटा बना रहे.

इंटरनेट को अपराध और अनैतिकता के स्रोत पर देखे जाने की परंपरा तेहरान में लंबी है. यह दिखाने की कोशिश की जाती है कि इंटरनेट यूजर अनैतिक पोस्ट डालते हैं और इसे अपराध बताया जाता है. अराश अबादपोर मानते हैं कि नेता इंटरनेट अपराधियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को एक साथ नहीं रख सकते.

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के मुताबिक वियतनाम इंटरनेट के शीर्ष पांच दुश्मनों में शामिल है. इंटरनेट की आजादी की पैरवी के लिए मानवाधिकार संगठन ने मिलकर गूगल के साथ एक पुरस्कार की घोषणा की है. इस साल यह पुरस्कार वियतनाम के ब्लॉगर हुइंच न्गोक चेन्ह को दिया गया. उनकी वेबसाइट करीब 15 हजार लोग रोजाना पढ़ते हैं. उनके अपने देश में ये वेबसाइट प्रतिबंधित है. लेकिन तकनीकी मदद से दुनिया भर में ये पढ़ी जा सकती है.

डॉयचे वेले भी बॉब्स पुरस्कारों के जरिए इंटरनेट कार्यकर्ताओं का समर्थन करता है. ब्लॉग्स पुरस्कार के लिए इस साल 4,200 से ज्यादा ब्लॉग्स अलग अलग भाषाओं में नामांकित किए गए हैं. अप्रैल की शुरुआत से बॉब्स की जूरी के साथ ही यूजर्स भी बेस्ट ब्लॉग्स चुन सकेंगे.

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