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विज्ञान

इंटरनेट में छुपते लोग

इंटरनेट यूजर्स कई नामी वेबसाइटों से खीझने लगे हैं. लोग ऑनलाइन के बजाए छिपे हुए रहना ज्यादा पसंद करने लगे हैं. ताजा रिपोर्टें वेबसाइटों को यह सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि वे अपनी चूक सुधारें, वरना लोग हाथ से निकल जाएंगे.

अपने कंप्यूटर पर आप जब कुछ खास वेबसाइट खोलें और किनारे में एक ही तरह के विज्ञापन आने लगें तो समझ जाइए कि आपके डाटा का विश्लेषण कर वेबसाइट उससे पैसा बना रही है. मसलन अगर कोई यूजर बहुत ज्यादा लड़कियों की फोटो देखता है या उनकी जानकारी जुटाता है तो डेटिंग के विज्ञापन आने लगेंगे. कोई शेयर बाजार की हलचल पर नजर रखता है तो इनवेस्टमेंट कंपनियों के विज्ञापन आने लगेंगे. यानी ग्राहकों की इंटरनेट इस्तेमाल और सर्च के आधार पर इंटरनेट कंपनियां उन्हें खास श्रेणियों में बांटती हैं और फिर उसी के मुताबिक विज्ञापन देती हैं और पैसे बनाती हैं.

लेकिन कई देशों के लोग अब यह समझने लगे हैं. लंदन की टेक्नोलॉजी रिसर्च फर्म ओव्यूम के मुताबिक 11 देशों के 68 फीसदी लोग चाहते हैं कि कोई भी वेबसाइट उनकी गतिविधियों को ट्रैक न करे. इंटरनेट यूजर्स उन वेबसाइटों में ज्यादा दिलचस्पी लेने लगे हैं जो 'डू नॉट ट्रैक' का विकल्प दे रही हैं.

रिसर्च के मुताबिक अपनी निजी जानकारी को बचाने के प्रति भी इंटरनेट यूजर्स पहले से कहीं ज्यादा सजग हो गए हैं. चैटिंग के दौरान भी ज्यादातर लोग 'ऑनलाइन' रहने के बजाए 'इनविजिबल' रहना पसंद कर रहे हैं. इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की आदत में हो रहे बदलाव के बारे में लंदन की फर्म ओव्यूम कहती है, "ग्राहकों का रुख सख्त होता जा रहा है, मजबूत होते नियामकों की वजह से भी व्यक्तिगत डाटा की सप्लाई में बाधा आ रही है, ऐसा माना जा सकता है कि इसका असर विज्ञापनों पर पड़ेगा. कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट, डाटा विश्लेषण और डिजीटल उद्योग पर भी इसका असर पड़ेगा."

Google Logo Laptops

कई देशों में जांच से गुजरता गूगल

ओव्यूम के मुख्य विश्लेषक मार्क लिटिल कहते हैं, नए टूलों के जरिए इंटरनेट यूजर्स "अपने निजी डाटा की निगरानी, उसका नियंत्रण और उसकी सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा सजगता से कर रहे हैं." फर्म के मुताबिक मोबाइल मैसेजिंग सर्विस व्हाट्सऐप, फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियां ग्राहकों से मिली जानकारी का विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल कर रही हैं. इंटरनेट यूजर्स के खीझने की यह भी एक वजह है.

पिछले हफ्ते ही कनाडा और नीदरलैंड्स की संयुक्त जांच में यह पता चला कि व्हाट्स ऐप ने निजता कानून को तोड़ा. स्मार्टफोन पर व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने वालों को अपने फोनबुक का पूरा ब्योरा देने के लिए राजी होना पड़ता है. नीदरलैंड्स और कनाडा के नियमों के मुताबिक ऐसा करना गैरकानूनी है.

अमेरिका के प्यू सर्वे ने भी निजता को लेकर इंटरनेट कंपनियों को आगाह किया है. प्यू की नई रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक से भी लोग खीझते दिख रहे हैं. 61 फीसदी अमेरिकी फेसबुक से एक एक हफ्ते का ब्रेक ले रहे हैं. 20 फीसदी इंटरनेट यूजर तो फेसबुक के अकाउंट बंद भी कर चुके हैं.

दुनिया भर में फेसबुक के 106 करोड़ यूजर हैं, जो महीने में एक बार फेसबुक खोल ही लेते हैं. हालांकि इनमें 15 करोड़ फर्जी अमेरिकी अकाउंट भी हैं.

ओएसजे/एमजे (एपी, एएफपी)

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