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खेल

'इंग्लैंड में बाहर के खिलाड़ी न हों'

इंग्लैंड के मिडफील्डर जैक विलशर के एक बयान पर विवाद छिड़ गया है. विलशर का कहना है कि राष्ट्रीय टीम में सिर्फ इंग्लैंड के खिलाड़ियों को ही जगह मिलनी चाहिए, विदेशियों को नहीं.

विलशर का कहना है, "सिर्फ इंग्लैंड के खिलाड़ियों को ही राष्ट्रीय टीम में जगह मिलनी चाहिए, अगर आप पांच साल से इंग्लैंड में रह रहे हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि आप भी इस देश के ही हो गए." राष्ट्रीय टीम के मिडफील्डर का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब इंग्लिश फुटबॉल संघ यह तय करने की कोशिश में है कि क्या मैनचेस्टर यूनाइटेड के खिलाड़ी अदनान जानुजाज को टीम में शामिल किया जा सकता है.

जानुजाज के मां बाप कोसोवो और अल्बेनिया के हैं और वह खुद बेल्जियम में पैदा हुए हैं. 18 साल के जानुजाज को बेहतरीन प्रतिभा माना जा रहा है, जो 2011 में मैनयू के साथ जुड़े थे. पिछले शनिवार को उनके दो गोलों की मदद से टीम ने संडरलैंड को 2-1 से हराया. फीफा के नियमों के मुताबिक अगर कोई खिलाड़ी पांच साल से ज्यादा किसी देश में रहता है, तो वह उस देश की राष्ट्रीय टीम से खेल सकता है. इस हिसाब से जानुजाज 2018 में इंग्लैंड के लिए विश्व कप खेल सकते हैं.

लेकिन विलशर इस फैसले से खुश नहीं हैं, "अगर आप पांच साल तक इंग्लैंड में रह चुके, तो मेरे ख्याल से आप इंग्लैंड के नहीं हुए. आपको नहीं खेलना चाहिए. अगर मैं पांच साल तक स्पेन में जाकर रह लेता हूं तो मैं स्पेन के लिए थोड़े ही खेलने लगूंगा. मेरे विचार से सिर्फ इंग्लिश खिलाड़ियों को ही इंग्लैंड के लिए खेलना चाहिए."

युवा फुटबॉलर जानुजाज के प्रदर्शन के बाद इंग्लैंड के मैनेजर रॉय हॉजसन का कहना है कि "उस पर नजर" रखी जा रही है. पर विलशर इस बात से खुश नहीं हैं, "हमें नहीं भूलना चाहिए कि हम क्या हैं. हम इंग्लैंड के हैं. हम मेहनत करते हैं. मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करते हैं और हमें हराना मुश्किल है." इंग्लैंड में फुटबॉल की लंबी परंपरा रही है और लीग फुटबॉल के मामले में इसे दुनिया की सबसे मजबूत और स्थायी प्रबंधन के लिए जाना जाता है. इंग्लैंड की टीम ने 1966 में विश्व कप फुटबॉल जीता है. लेकिन इसके बाद से उनका प्रदर्शन फीका रहा है. यहां तक कि पिछले साल हुए यूरो कप में वे क्वालीफाई भी नहीं कर पाए.

इंग्लैंड के 21 साल से कम उम्र के मैनेजर गार्थ साउथगेट ने इसकी तुलना देश की क्रिकेट टीम से की है, जिसमें हाल के दिनों में विदेशों में जन्मे खिलाड़ियों की भरमार हो गई है. उनका कहना है, "हमें लगता है कि हमने क्रिकेट टीम को अपना लिया है, जिसने ऐशेज भी जीता है. लेकिन यह सुंदर और फिलॉसफी से जुड़ा बयान लगता है." हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जानुजाज ने किसी और टीम के लिए नहीं खेला है और अब दुनिया बदल गई है, जहां कई लोग दूसरे देशों में जाकर काम करने लगे हैं.

एजेए/एमजे (एपी, रॉयटर्स)