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दुनिया

आसियान से दोस्ती बढ़ाता भारत

दक्षिण पूर्वी एशिया के देश भारत के साथ और करीबी सहयोग करना चाहते हैं. नई दिल्ली में आसियान देशों के प्रतिनिधि भारतीय नेताओं से मिलेंगे. दक्षिण चीन सागर में भारत चीन विवाद को देखते हुए इस बैठक की अहमियत और बढ़ गई है.

भारतीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद कहते हैं कि यह बैठक दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन आसियान और भारत के बीच 20 साल के कूटनीतिक संबंधों को दर्शाता है. खुर्शीद के मुताबिक इस बैठक में स्थानीय राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से बातचीत नहीं होगी. लेकिन अधिकारियों के मुताबिक तेल और प्राकृतिक संसाधनों के लिए धनी माने जाने वाले दक्षिण चीन सागर पर आसियान औऱ भारत एक साझा बयान निकालेंगे जिसमें वहां स्वतंत्र तौर पर यातायात की बात कही जाएगी.

वियतनाम और फिलिपींस सहित कई आसियान देश दक्षिण चीन सागर पर हक जताते हैं. अमेरिका ने इलाके में शांति रखने की बात कही है लेकिन आसियान के देश भारत की तरफ देख रहे हैं. ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में काम कर रहे विश्लेषक सी राजामोहन कहते हैं कि भारत से एक बड़ी भूमिका की मांग की जा रही है क्योंकि उस इलाके में अनिश्चितता बढ़ रही है. अगर भारत दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों से अपने संबंध बेहतर करता है तो उसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने का मौका मिलेगा. साथ ही इन इलाकों में प्राकृतिक संसाधन भी बहुत हैं.

10 सदस्य देशों वाले आसियान और भारत के बीच पिछले साल व्यापार करीब 80 अरब डॉलर का था. बुधवार को शुरू होने वाली बैठक में आसियान और भारत के बीच खुले व्यापार समझौते पर भी हस्ताक्षर हो सकते हैं. लेकिन जैसा कि भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद खुद बताते हैं, "भारत और आसियान देशों को अच्छी तरह जोड़ने की जरूरत है, सड़कों, रेल और हवाई यात्रा के जरिए. भारत एक योजना पर काम कर रहा है जिससे कि आसियान देशों में अगले दस सालों में भारतीय कूटनीतिज्ञों की संख्या को दोगुना किया जाएगा."

बुधवार के बैठक में थाइलैंड, सिंगापुर, कंबोडिया, मलेशिया और वियतनाम के प्रधानमंत्रियों के अलावा लाओस, म्यांमार और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति और फिलिपींस के उप राष्ट्रपति हिस्सा लेने वाले हैं. खुले व्यापार समझौते के बारे में कहा जा रहा है कि फिलिपींस और इंडोनेशिया समझौते पर तुरंत हस्ताक्षर करने के लिए राजी नहीं होंगे.

फिलिपींस और इंडोनेशिया बीपीओ सेक्टर में सक्रिय हैं और फिलिपींस विश्व की हिस्सेदारी अंतरराष्ट्रीय आउटसोर्सिंग बाजार में 15 प्रतिशत है. फिलिपींस के श्रम दल में कुल तीन करोड़ 50 लाख लोगों में से 51 प्रतिशत बीपीओ में काम करते हैं और इस वक्त वह इस क्षेत्र में भारत से प्रतिस्पर्धा नहीं चाहता. पिछले साल आसियान और भारत में सामग्री व्यापार के लिए बाजार खोलने की बात हुई. इस साल सेवाओं और निवेश के लिए भी भारत और आसियान के बाजारों को खोलने की बात चल रही है.

एमजी(रॉयटर्स, पीटीआई)

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