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दुनिया

आसमान में पहुंचा टाटा

नाकामी के 18 साल बाद टाटा इंडस्ट्री ने एक बार फिर आसमान में छलांग लगाई है. सिंगापुर एयरलाइंस के साथ करार हुआ है कि दोनों मिल कर विमान सेवा शुरू करेंगे.

नमक से लेकर कार तक बनाने वाली करीब 100 अरब डॉलर की कंपनी टाटा सन्स ने सिंगापुर एयरलाइंस के साथ एमओयू पर दस्तखत किए हैं. टाटा इस समझौते में 51 फीसदी का रकम लगाएगी, जबकि बाकी पैसा सिंगापुर एयरलाइंस का होगा.

समझौते में कहा गया है कि "हवा में सफर की मांग बढ़ेगी", हालांकि इसे अभी भारत के विदेशी निवेश प्रमोशन बोर्ड से हरी झंडी मिलना बाकी है. बयान में कहा गया है कि नई सेवा दिल्ली से शुरू होगी और "पूरे स्तर" पर काम करेगी.

बोर्ड में शुरू में तीन सदस्य होंगे, जिनमें से दो की नियुक्ति टाटा और एक की नियुक्ति सिंगापुर एयरलाइंस करेगी. बोर्ड के चेयरमैन टाटा के नुमाइंदे प्रसाद मेनन होंगे. यह तीसरा मौका है, जब ये दोनों मिल कर भारत के विमानन सेवा में प्रवेश की कोशिश कर रहे हैं. 1995 में उन्होंने पूरी सेवा वाली एयरलाइन शुरू करने की अर्जी दी थी, जिसे एक साल बाद मंजूरी तो मिल गई लेकिन इस पर कभी अमल नहीं हो पाया क्योंकि 1997 में घरेलू विमान सेवा के नियमों में बड़े बदलाव किए गए.

रिश्वत नहीं दी

इसी दौरान रतन टाटा ने एक बड़ा जबरदस्त बयान भी दिया था कि "डील नहीं हो पाई क्योंकि कंपनी ने एक केंद्रीय मंत्री को रिश्वत नहीं दी." सरकार ने पिछले साल विमानन के नियमों में बदलाव किया है. बाद में 2000 में टाटा और सिंगापुर एयरलाइंस ने मिल कर एयर इंडिया के विनिवेश में 40 फीसदी हिस्सा खरीदने की कोशिश की थी, जो पूरी नहीं हो पाई. अब दोनों ने तीसरी कोशिश की है.

सिंगापुर एयरलाइंस के मुख्य कार्यकारी जोह चून फोंग का कहना है, "हम हमेशा से इस बात पर विश्वास करते आए हैं कि भारत के विमान सेवा क्षेत्र में काफी गुंजाइश है. टाटा सन्स भारत का एक स्थापित और सम्मानजनक नाम है. हाल में उदारवादी नीतियों के बाद यह सही वक्त है कि हम भारत में मिल कर काम करें."

कंपनी ने साफ किया है कि वे घरेलू विमान सेवा के साथ काम शुरू करेंगे. कंपनी के प्रवक्ता का कहना है, "हम चाहेंगे कि पहले घरेलू सेवा से शुरुआत करें लेकिन यह तभी होगा, जब आगे इसकी मंजूरी मिलती है."

नाम, लोगो बाद में

कंपनी का नाम, लोगो और दूसरी चीजों का एलान बाद में किया जाएगा. टाटा हमेशा से विमानन में आना चाहता था. मुंबई में फॉरच्यून इक्विटी ब्रोकर्स के महांतेश सबाराद का कहना है, "हो सकता है कि जब भारत ने निवेश की शर्तें आसान की हैं, तो उनकी महत्वाकांक्षा एक बार फिर जाग उठी है."

टाटा ने इस साल के शुरू में कहा था कि वह मलेशिया की एयर एशिया के साथ घरेलू स्तर पर विमान सेवा शुरू करना चाहती है, जिसे भारत में विदेशी निवेश पैनल से मंजूरी मिल चुकी है. उस प्रस्तावित एयरलाइन में एयर एशिया के 49 फीसदी, टाटा के 30 फीसदी और टेलस्ट्रा के 21 फीसदी शेयर होंगे. भारत ने पिछले साल ही निवेश के लिए शर्तों को आसान किया है.

हालांकि भारत में घरेलू विमान सेवा का कारोबार काफी मंदा चलता है. सिर्फ इंडिगो मुनाफे में चल रही है, जबकि इंडियन, किंगफिशर, जेट एयरवेज और गो एयर जैसी विमान कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. घाटे की वजह से किंगफिशर ने तो अपनी उड़ानें ही बंद कर दी हैं, जबकि हाल ही में कंपनियों ने भारत में घरेलू उड़ान के किराए में जबरदस्त इजाफा किया है.

एजेए/एएम (पीटीआई, एएफपी)