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ताना बाना

आशावादी हो रहे हैं जर्मनी के युवा

सन 2006 में सिर्फ 50 फीसदी जर्मन युवा भविष्य के प्रति आशावान थे. इस बीच उनकी संख्या बढ़कर 59 फीसदी हो चुकी है. देश की परिवार कल्याण मंत्री क्रिस्टिना श्रोएडर ने आज बर्लिन में इसकी जानकारी दी.

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परिवार कल्याण मंत्री श्रोएडर समाज विज्ञानी माथियास आलबैर्ट के साथ युवाओं के बारे में सन 2010 का शेल अध्ययन प्रस्तुत कर रही थीं. इस अध्ययन से पता चला है कि आर्थिक संकट व बेरोजगारी की आशंका के बावजूद जर्मन युवा भविष्य के प्रति निराश नहीं है. सिर्फ 7 फीसदी युवाओं में ऐसी निराशा देखी गई, जबकि 35 फीसदी की कोई स्पष्ट राय नहीं है.

आम तौर पर युवाओं में आशावादिता बढ़ी है, लेकिन यहां सामाजिक अंतर का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है. आर्थिक रूप से कमजोर तबकों में सिर्फ एक तिहाई युवा भविष्य के प्रति आश्वस्त हैं. एक दूसरे आंकड़े से भी इस तथ्य की पुष्टि होती है. कुल मिलाकर तीन चौथाई युवा अपने जीवन से कुल मिलाकर संतुष्ट हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर तबकों में ऐसे युवाओं का अनुपात सिर्फ चालीस फीसदी है.

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जर्मनी की आबादी घटती जा रही है. लेकिन इस बीच देखा जा रहा है कि युवा लोग बच्चे चाहते हैं. ठीक ठीक कहा जाए तो 65 फीसदी युवक और 73 फीसदी युवतियां. चार साल पहले यह अनुपात 56 और 69 फीसदी था.

जर्मनी के युवा फिर से राजनीति में दिलचस्पी ले रहे हैं. सन 2002 में ऐसे युवाओं की संख्या सिर्फ 34 फीसदी थी, सन 2006 में बढ़कर 39 फीसदी हुई, इस बीच वह 40 फीसदी तक पंहुच चुकी है. इसके अलावा सामाजिक संगठनों में भी उनकी दिलचस्पी बढ़ रही है. 39 फीसदी युवा किसी न किसी क्षेत्र में सक्रिय हैं. 70 फीसदी का मानना है कि सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए कुछ करना जरूरी है.

नौकरी पाने के मामले में भी उनके बेहतर मौके नजर आ रहे हैं. 76 फीसदी का मानना है कि प्रशिक्षण के बाद उन्हें नौकरी मिल जाएगी. लेकिन गरीब तबकों में ऐसे युवाओं की संख्या सिर्फ 41 फीसदी है. शिक्षा के महत्व को वे स्वीकार करते हैं. और जिन्हें बेहतर शिक्षा मिली है, वे दूसरों के मुकाबले कहीं अधिक आशावादी हैं. परिवार कल्याण मंत्री क्रिस्टिना श्रोएडर ने इस अध्ययन से निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि कमजोर तबकों के बच्चों के लिए विकास की संभावनाएं बढ़ाने पर जोर देना पड़ेगा.

शेल कंपनी की ओर से बीलेफेल्ड के समाजविज्ञान संस्थान व म्युनिख के टीएनएस इन्फ्राटेस्ट शोध संस्थान ने यह रिपोर्ट प्रस्तुत की है. इस सिलसिले में 12 से 25 साल तक के ढाई हजार से अधिक युवाओं के बीच सर्वेक्षण किया गया था.

रिपोर्ट: एजेंसियां/उभ

संपादन: महेश झा