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विज्ञान

आवाज से चलने पर भी नहीं बनी बात

कार चलाते वक्त ध्यान न बंटे इसके लिए आवाज से काम करने वाले कुछ यंत्र नई गाड़ियों में लगाए जा रहे हैं. लेकिन एक रिसर्च बता रही है कि इससे जोखिम बढ़ सकता है.

नई कारों में बोलने भर से एसएमएस भेजने वाला यंत्र हादसों को रोक पाने में उतना कारगर नहीं जितना सोचा गया था. उम्मीद की गई थी कि ये यंत्र हाथ से एसएमएस टाइप करने के मुकाबले कम जोखिम से भरा होगा. गाड़ी चलाते समय ध्यान बंटाने से बचाने वाले उपायों का मानक विकसित करने के लिए अमेरिका की उटा यूनिवर्सिटी रिसर्च कर रही है. रिसर्च करने वालों ने 32 ड्राइवरों के साथ एक प्रयोग कर कुछ नई जानकारी जुटाई है. इन ड्राइवरों के सिर को सेंसर से तार के जरिए जोड़ सिम्युलेटर और असली कारों के साथ कई परीक्षण किए गए.

रिसर्च तो अभी चल ही रहा है लेकिन कुछ शुरुआती नतीजे बता रहे हैं कि हाथ का इस्तेमाल न करने वाले और महज बोलने भर से एसएमएस भेज देने वाले यंत्र भी गाड़ी चलाने के दौरान रेडियो सुनने या यात्रियों के साथ बातचीत की तुलना में ज्यादा ध्यान बंटाते हैं. बहुत सी नई कारों में यह यंत्र लगा है. रिसर्च के नतीजों में कहा गया है, "साफ है कि गाड़ी में आवाज आधारित यंत्र अपनाने के जो परिणाम उम्मीद से हट कर हैं और वो यातायात की सुरक्षा पर बुरा असर डालेंगे. नई तकनीक अगर आपको सड़क से निगाह हटाने से बचा ले रही है तो इसका मतलब यह नहीं है कि चलती गाड़ी में इसका इस्तेमाल सुरक्षित है."

प्रयोग में शामिल 12 पुरुष और 20 महिलाओं की उम्र 18 से 33 साल के बीच थी. इन सब लोगों का ड्राइविंग रिकॉर्ड बहुत अच्छा था और सबने यह भी माना कि वो अकसर ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं. पिछले साल नेशनल सेफ्टी काउंसिल की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि अमेरिका में गाड़ियों के टकराने के 24 फीसदी हादसे मोबाइल फोन के इस्तेमाल की वजह से होते हैं. कई राज्यों में इस पर रोक लगाने के बावजूद गाड़ी चलाने वाले लोग अकसर मोबाइल फोन का इस्तेमाल ड्राइविंग के दौरान करते हैं.

नतीजों पर विवाद

उद्योग जगत के एक गुट कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन ने उटा यूनिवर्सिटी के रिसर्च के नतीजों पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा है कि रिसर्च के "तौर तरीकों में बहुत सारी कमियां" हैं. एसोसिएशन ने बयान जारी कर कहा है, "इस रिसर्च को वास्तविक नहीं माना जा सकता क्योंकि यह युवा ड्राइवरों को अपरिचित कारों में, खास हैलमेट पहना कर एक निश्चित रूट पर ड्राइविंग करा कर हासिल किए गए हैं, वास्तविक ड्राइवरों को वास्तविक स्थितियों में डाल कर नहीं." एसोसिएशन ने वर्जीनिया टेक की एक रिसर्च को "सचमुच वास्तविक" बताया है जो नेशनल हाइवे ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन के लिए किया गया था. इस रिसर्च के मुताबिक आवाज आधारित यंत्रों से, "सुरक्षा पर खतरा नहीं बढ़ता" है.

एनआर/एमजे (एएफपी)

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