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दुनिया

आर्थिक सुधारों की बढ़ रही है रफ्तार

आर्थिक सुधारों की गुहार पूरी दुनिया में लगी है. लेकिन वर्ल्ड बैंक की नई रिपोर्ट का कहना है कि अफ्रीका, यूरोप और मध्य एशिया में आर्थिक सुधारों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है. खासकर गरीब इलाके तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.

लाल फीताशाही और अत्यधिक नियमन अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े दुश्मन हैं. वर्ल्ड बैंक की नई रिपोर्ट के अनुसार कारोबार शुरू करने से पहले उद्यमियों को औसत सात अर्जियां देनी पड़ती है और 25 दिनों तक इंतजार करना पड़ता है. डूइंग बिजनेस 2014 नाम की इस रिपोर्ट के लिए वर्ल्ड बैंक ने दुनिया के 189 देशों में सर्वे कराया है और निवेश की शर्तों की जांच की है. इसका एक नतीजा यह है कि न्यूजीलैंड में आधे दिन के अंदर कंपनी खोलकर कारोबार शुरू किया जा सकता है जबकि वेनेजुएला में इसके लिए 144 दिन और सूरीनाम में 208 दिन लगते हैं.

निवेश में आसानी वाले देशों की कतार में परंपरागत रूप से सबसे आगे सिंगापुर, हॉन्ग कॉन्ग और न्यूजीलैंड रहे हैं. उनके बाद अमेरिका, डेनमार्क और मलेशिया का नंबर है. इस रैंकिंग लिस्ट में जर्मनी 21वें स्थान पर है और लिथुएनिया, थाइलैंड और मॉरीशस से पीछे हैं. रिपोर्ट की मुख्य लेखिका और वर्ल्ड बैंक की निदेशक रीटा रमाल्यो खुश होकर कहती हैं, "विश्व भर में सुधार करने की रफ्तार में तेजी आई है. हमने एक साल के भीतर अर्थव्यवस्था के लिए मददगार 238 सुधार देखे हैं." 2009 में वित्तीय संकट के बाद से यह सुधारों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या है.

यूरोप और मध्य एशिया विजेता

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ओईसीडी के फौरन बाद वर्ल्ड बैंक ने यूरोप और मध्य एशिया की शिनाख्त ऐसे देशों के रूप में की है जहां सुधारों की गति सबसे तेज है. वहां 19 अर्थव्यवस्थाओं ने एक साल के अंदर 65 आर्थिक सुधार किए हैं. इनमें यूक्रेन, कोसोवो और रूस शामिल हैं. वैश्विक विश्लेषण विभाग के निदेशक ऑगुस्तो लोपेज क्लारोस कहते हैं, "यदि आप उन 20 देशों को देखें जिन्होंने 2009 से नियमों के संशोधन में सबसे ज्यादा प्रगति की है, तो उनमें से नौ यूरोप और मध्य एशिया के हैं." उनमें अर्मेनिया, बेलारूस, जॉर्जिया, मेसेडोनिया, मोल्दाविया और पोलैंड शामिल हैं.

वर्ल्ड बैंक की निदेशक रीटा रमाल्यो का कहना है, "स्टडी का एक और खुश करने वाला नतीजा है, जिसे हम कंवर्जेन्स कहते हैं. इसका मतलब है कि जिन देशों में पहले बहुत ज्यादा नौकरशाही बाधाएं थी, वे नौकरशाही कम करने के मामले में सबसे ज्यादा प्रगति करने वाले देशों में शामिल हैं." इसका मतलब यह भी है कि चोटी के देशों के साथ दूरियां कम हो रही हैं.

भ्रष्टाचार और नौकरशाही की समस्याएं झेल रहा भारत अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में 134वें नंबर पर है. लेकिन मजेदार तथ्य यह है कि भारत के अंदर कारोबार शुरू करने के मामले में दिल्ली पहले नंबर पर है. कारोबार शुरू करने के मामले में नई दिल्ली सबसे तेज है तो कारोबार बंद करने के मामले में हैदराबाद सबसे आगे हैं. बंगलोर में व्यवसाय शुरू करना सबसे मुश्किल है तो कोलकाता में उसे बंद करना भारत में सबसे ज्यादा कठिन है.

अफ्रीका रहा है तेजी से करीब

रमाल्यो का कहना है कि यह रुझान अफ्रीकी देशों में भी देखा जा सकता है. "इस साल आइवरी कोस्ट, रवांडा और बुरुंडी उन देशों में शामिल हैं जिन्होंने सुधारों के मामले में तेज प्रगति की है." पिछले करीब नौ साल से देखा जा सकता है कि अफ्रीका में सुधारों की रफ्तार परंपरागत औद्योगिक देशों के मुकाबले तिगुनी है.

वर्ल्ड बैंक की ग्लोबल स्टडी में शामिल विश्वविद्यालयों और संस्थानों के अनुसार दुनिया भर में पिछले साल 30 लाख से ज्यादा नए कारोबार शुरू किए गए और उन्हें शुरू करने पर 4.7 करोड़ दिन खर्च हुए. रीटा रमाल्यो का कहना है कि यदि हर देश कारोबार शुरू करने को न्यूजीलैंड जितना आसान कर देगा तो दुनिया भर में 4.55 करोड़ काम के दिन बचाए जा सकेंगे.

नई स्टडी में पहली बार लीबिया, म्यांमार, सैन मरीनो और दक्षिण सूडान को भी शामिल किया गया है. सैन मरीनो 81 वें नंबर पर है और रैंकिंग सूची में बेहतर आधे देशों में शामिल है जबकि म्यांमार 182वें नंबर पर है और लीबिया तथा दक्षिण सूडान आखिरी देशों में शामिल हैं. स्टडी के मुताबिक सिर्फ सेंट्रल अफ्रीकी रिपब्लिक और चाड अपने कारोबारियों के लिए और ज्यादा मुश्किलें खड़ी करते हैं.

रिपोर्ट: रॉल्फ वेंकेल/एमजे

संपादन: आभा मोंढे

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