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दुनिया

आर्थिक तंगी का शिकार इस्लामिक स्टेट, आमदनी में भारी कमी

इराक और सीरिया में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट का इलाका सिमटता जा रहा है. ऐसे में, उसकी आमदनी भी घट रही और उसे पैसे के नए स्रोतों की तलाश है.

इस्लामिक स्टेट का पहले जितना इलाका था, वो अब सिमट कर लगभग आधा रह गया है और एक खिलाफत कायम करने का उसका सपना भी बिखर रहा है. जिस पैसे के दम पर इस्लामिक स्टेट को ताकत मिली, उसके स्रोत अब सूख रहे हैं. ऐसे में, वो अपहरण और फिरौती जैसे आपराधिक कामों की तरफ बढ़ रहा है. अल कायदा की तरह इस्लामिक स्टेट भी विदेशों से चंदा हासिल करना चाहता है.

इन दिनों, इराक में आईएस के सबसे बड़े गढ़ मोसुल में इराकी सेना अभियान चला रही है. ऐसे में, तेल और गैस के जिन भंडारों से आईएस को 2014 में एक अरब डॉलर की आमदनी हुई थी, उन तक उसकी पहुंच नहीं रही. ये बात अमेरिकी वित्त मंत्रालय में सहायक मंत्री डेनियल ग्लासर ने कही है जो आतंकवाद को मिलने वाली वित्तीय सहायता से जुड़े विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह कहते हैं, "आय के सिमटते स्रोतों के कारण आईएस भी उन्हीं हथकंडों का इस्तेमाल करता दिख रहा है जो अल कायदा करता है."

जानिए आईएस के बारे में पांच अहम बातें

तेल और गैस की बिक्री के अलावा इस्लामिक स्टेट ने पिछले साल इराक में टैक्स और फिरौती के जरिए हर महीने तीन करोड़ डॉलर की रकम हासिल की थी. इराकी सरकार के एक सलाहकार और इस्लामिक स्टेट से जुड़े मामलों पर विशेषज्ञ हिशाम अल-हाशिमी कहते हैं कि इस समय अकेले मोसुल में आईएस को हर महीने टैक्स के जरिए 40 लाख डॉलर मिल रहे हैं. उनका कहना है कि इस्लामिक स्टेट प्रति महीने 600 डॉलर से कम के वेतन पर चार प्रतिशत टैक्स लगाता है जबकि 600 से 1000 डॉलर के बीच मासिक वेतन पर पांच प्रतिशत टैक्स लिया जाता है.  

बैंक डकैती इस्लामिक स्टेट की आमदनी का तीसरा बड़ा जरिया है. 2014 में जब आईएस ने मोसुल पर कब्जा किया था तो वहां के सरकारी बैंकों में 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा की रकम थी. ग्लासर का कहना है कि अब इस्लामिक स्टेट को आर्थिक किल्लत का सामना करना पड़ा रहा है. उसके लड़ाकों के वेतनों में कटौती हो रही है. इस्लामिक स्टेट की राजधानी कहे जाने वाले सीरियाई शहर रक्का समेत कई इलाकों में आईएस लड़ाकों के वेतन में 50 फीसदी तक की कटौती की गई है. आईएस ने एक आंतरिक करप्शन एजेंसी भी कायम है जिससे वहां भ्रष्टाचार होने के बारे में भी इशारा मिलता है.

देखिए आईएस के कितने नाम हैं

पेरिस स्थित "सेंटर ऑफ द अनालिसिस ऑफ टेररिज्म" नाम की संस्था का कहना है कि आमदनी में हो रही कमी की भरपाई करने के लिए आईएस फिरौती जैसी आपराधिक गतिविधियों से पैसा बनाने में लग गया है. इसके मुताबिक 2015 में आईएस की आमदनी में फिरौती से मिलने वाली रकम की हिस्सेदारी 33 फीसदी थी जबकि 2014 ये 12 प्रतिशत रही.

सीरिया में इस्लामिक स्टेट का कामकाज पैसे की वजह से प्रभावित हो रहा है. वहां पहले लड़ाकों को अमेरिकी डॉलर में वेतन दिया जाता था लेकिन अब उन्हें सीरियाई पाउंड में तन्ख्वाहें मिल रही हैं. पत्रकार जायद अवद कहते हैं कि इससे पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा तक उनकी पहुंच सिमट रही है. उनका कहना है कि हवाई हमलों के कारण तेल के भंडारों से राजस्व हासिल करना आईएस के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है.

तुर्की में रहने वाले अवद के मुताबिक, "इन तेल के कुओं से आईएस को हर दिन 20 लाख डॉलर मिल रहे थे. लेकिन उनका इलाका अब घट रहा है इसलिए तुर्की और इराक में उनके लिए बाजार भी सिमट रहा है." यही नहीं, इराकी सरकार ने भी आईएस के इलाकों में रह रहे लोगों के वेतन रोक दिए हैं ताकि आईएस को टैक्स के रूप में मिलने वाले रकम पर शिकंजा कसा जा सके. ग्लासर का कहना है कि इससे आईएस को झटका लगा है. आईएस के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिलने वाला सलाना सरकारी वेतन दो अरब डॉलर के आसपास होता है.

आप आईएस के बारे में कितना जातने हैं?

लेकिन ऐसी भी खबरें हैं कि चरमपंथी कुछ लोगों को जबरदस्ती अपने इलाकों से जाने को कह रहे हैं. य् मोसुल में रहने वाले ऐसे सरकारी कर्मचारी हैं जिनका वेतन रोक दिया गया था. अब आईएस चाहता है कि वे लोग मोसुल से बाहर जाएं ताकि वे अपना वेतन ले सकें. ऐसे में, उनकी संपत्ति पर आईएस का ही कब्जा रहता है और जब वे वापस आते हैं तो उनसे टैक्स वसूल लिया जाता है.

एके/वीके (एपी)

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