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विज्ञान

आर्कटिक पर और 10,000 साल पहले थे इंसान

प्रागैतिहासिक काल में रहने वाले विशाल हाथियों के ऐसे अवशेष मिले हैं जिनपर तीर और भालों से हमलों के निशान हैं. रिसर्चरों का मानना है कि ये इस बात का संकेत है कि इंसान आर्कटिक के इलाके में और 10,000 साल पहले से ही रहते थे.

विज्ञान पत्रिका साइंस में प्रकाशित एक रिपोर्ट का कहना है कि हमें ज्ञात तारीख से हजारों साल पहले से ही इंसान आर्कटिक पर रहते थे. साइबेरियाई आर्कटिक के रूसी वैज्ञानिकों की एक टीम की खोज धरती के इतिहास पर काम करने वाले विशेषज्ञों को पुराने अनुमानों पर पुनर्विचार करने को बाध्य कर रही है. पुराने आकलन के अनुसार उस इलाके में इंसानी बस्तियां करीब 35,000 साल पहले बसनी शुरू हुई थी. नए शोध के अनुसार इंसान उस इलाके में 45,000 साल पहले ही रहते होंगे. यह अब तक के अनुमान से 10,000 साल ज्यादा है.

आर्कटिक में इंसानी बस्ती के बारे में पुनर्विचार 2012 में हुए एक अध्ययन पर आधारित है जिसे सेंट पीटर्सबर्ग के एकेडेमी ऑफ साइंसेस के अलेक्सी तिखोनोव और उनके साथियों ने किया था. वैज्ञानिकों ने साइबेरियाई आर्कटिक के केंद्र में एक विशालकाय जीव के बर्फ में दबे अवशेषों की खुदाई की. उसकी रेडियो कार्बन डेटिंग से वैज्ञानिकों ने पशु अवशेषों की उम्र 45,000 साल तय की. उनका कहना है कि विशालकाय हाथी की हड्डियों पर अस्वाभाविक चोट के निशान थे, जैसे कि उन पर तीखे हथियारों से हमला किया गया हो.

ये खोज और जानकारियां दिखाती हैं कि आर्कटिक साइबेरिया में उन दिनों शिकारी इंसान मौजूद थे. साइंस पत्रिका में प्रकाशित संक्षिप्त रिपोर्ट में कहा गया है, "विशाल जीवों के शिकार के विकास से उस समय इंसान का जीवित रहना और उत्तरी साइबेरियाई आर्कटिक में व्यापक रूप से फैलना संभव हुआ." रिसर्चरों का कहना है कि यह महत्वपूर्ण सांस्कृतिक बदलाव था, जिसकी वजह से इंसानों का बेरिंग इलाके में आना संभव हुआ और उन्हें करीब 22,000 साल पहले अंतिम ग्लेशियल मैक्सिमम से पहले नई दुनिया में घुसने का मौका मिला.

एमजे/आईबी (एएफपी)

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