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मनोरंजन

आरोपी के किरदार घुसते जा रहे हैं शाहरुख़

कोलकाता नाइट राइडर्स और शाहरुख़ खान की मुश्किलें बढ़ती जा रही है. जांच में सामने आया है कि नाइट राइडर्स के मैनजमेंट ने आईपीएल क़रार की शर्तों को तोड़ा. बीसीसीआई को अंधेरे में रखा. कंपनी अधिनियम के उल्लंघन का एक और आरोप.

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कोलकाता नाइट राइडर्स में शाहरुख़ ख़ान और उनकी पत्नी गौरी की 50 फ़ीसदी से ज़्यादा हिस्सेदारी है. आरोप है कि उन्होंने बीसीसीआई से बातचीत किए बग़ैर जूही चावला को मार्च 2009 में टीम की हिस्सेदारी दी. आईपीएल के फ्रैंचाइज़ी अनुबंध में कहा गया है कि इस तरह के फ़ैसलों के लिए बीसीसीआई की अनुमति ज़रूरी है.

रजिस्ट्रार ऑफ़िस (आरओसी) मुंबई से कार्पोरेट मामलों के मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है, "कंपनी की हिस्सेदारी में फर्क़ पड़ा है. यह फ्रैंचाइज़ी अनुबंध का उल्लंघन है."

आरओसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च में 40 लाख रुपये की इक्विटी कोलकाता नाइट राइडर्स में जूही चावला को दी गई. कंपनी में पहले से ही रे़ड चिली एन्टरटेनमेन्ट, सी आयलैंड इन्वेस्टमेंट(मॉरिशस) की हिस्सेदारी है.

Lalit Modi IPL

मोदी के साथ मुश्किल में

केकेआर मैनजमेंट ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं दी है और अधिकारियों के ईमेल्स का भी जवाब नहीं दिया गया है.

आईपीएल फ्रैंचाइज़ी अनुबंध के उल्लंघन का मामला ललित मोदी के निलंबन के बाद पिछले महीने बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर ने भी उठाया था. मनोहर का कहना था कि शेयर ट्रांसफर करने की स्थिति में बीसीसीआई की अनुमति ज़रूरी है. क़रार के तहत हिस्सेदारी के लेन देन पर बोर्ड को पांच फ़ीसदी फीस दिए जाने का नियम है.चूंकि फ्रैंचाइज़ी ने न तो अनुमति मांगी न ही फीस दी तो बीसीसीआई ने टीम के मालिकों से सफाई मांगी है.

आरओसी ने पाया कि कोलकाता नाइट राइडर्स ने कंपनी अधिनियम का भी उल्लंघन किया है. आरओसी का कहना है आईपीएल शुरू होते समय नाइट राइडर्स के पास बीस करोड़ रुपये की पूंजी थी फिर भी उन्होंने फुल टाइम कंपनी सेक्रेटरी की नियुक्ति नहीं की. यह कंपनी अधिनियम का उल्लंघन है. बैंलेस शीट सार्वजनिक न करने की वजह से केकेआर पर कंपनी एक्ट के उल्लंघन का एक आरोप पहले से भी लगा हुआ है.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि कंपनी ने बेलेघाटा ट्रस्ट और राजस्थान के मुख्यमंत्री के फंड में दिए 50 लाख रुपये के दान का भी सबूत नहीं दिया है.

आईपीएल विवाद के मद्देनज़र कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने रजिस्ट्रार कार्यालयों को फ्रैंचाइज़ी मालकियत, अनुबंध और दूसरी ज़रूरी बातों की जांच करने का आदेश दिया था.

रिपोर्टः पीटीआई/आभा मोंढे

संपादनः ओ सिंह

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