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दुनिया

आयलान के कार्टून पर बिदकी जनता

फ्रांस की व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो के तुर्की के तट पर मृत पाए गए बच्चे आयलान के एक कार्टून छापने की कड़ी आलोचना हो रही है. यह वही पत्रिका है जो आतंकी हमले का निशाना बनने के बाद फ्रीडम ऑफ स्पीच का प्रतीक बन कर उभरी थी.

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3 साल के आयलान की मौत के बाद कनाडा से ईयू मुख्यालय, ब्रसेल्स पहुंची रिश्तेदार फातिमा कुर्दी.

इसी साल जनवरी में शार्ली एब्दो के पेरिस कार्यालय पर आतंकी हमला हुआ था जिसमें पैगंबर मोहम्मद का कार्टून बनाने वाले कार्टूनिस्ट की हत्या कर दी गई. तब पूरा विश्व उनके साथ खड़ा हो गया था. एक बार फिर विश्व भर का ध्यान इस पत्रिका की ओर है लेकिन इस बार कम से कम सोशल मीडिया के यूजर्स तो पत्रिका के साथ खड़े नहीं दिख रहे हैं.

अपने इस अंक में पत्रिका ने मुखपृष्ठ पर नहीं बल्कि अंदर के पेज पर आयलान को दिखाने वाला कार्टून छापा है. इसे उस अपमानजनक भावना का चित्रण बताया जा रहा है जो यूरोप के मुख्यतया ईसाई देशों में व्याप्त है. तमाम यूरोपीय देश इस समय सीरिया और इराक जैसे युद्ध ग्रस्त देशों की मुस्लिम बहुल जनता के अभूतपूर्व विस्थापन का सामना कर रहे हैं.

शरणार्थी संकट को देखते हुए सवाल उठ रहे हैं कि अरब देश इन्हें शरण देने के लिए आगे क्यों नहीं आ रहे, जो सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक रूप से ऐसा करने की बेहतर स्थिति में हैं.

आयलान के परिवार के तुर्की से ग्रीस पहुंचने की असफल कोशिश में दोनों बच्चे और उनकी मां की जान चली गई थी. इस कार्टून में छोटे बच्चे आयलान के शव के साथ ही दूर बिलबोर्ड पर पश्चिमी फूड चेन का विज्ञापन दिख रहा है.

जनवरी में पत्रिका के दफ्तर पर हुए हमले के खिलाफ विरोध जताने वाले अनगिनत लोग फ्रीडम ऑफ स्पीच के समर्थन में सड़कों पर उतरे थे, अपने विवादास्पद कार्टूनों के लिए मशहूर व्यंग्य पत्रिका के समर्थन में नहीं. भारत समेत दुनिया के कई देशों से स्पष्ट और शक्तिशाली संदेश दिए गए.

पत्रिका के इसी अंक में एक और कार्टून है जिसमें येशू को पानी पर चलते दिखाया गया है और लिखा है, "ईसाई पानी पर चलते हैं, मुस्लिम बच्चे डूबते हैं." इसे उस कार्टूनिस्ट ने बनाया है जो जनवरी के आतंकी हमले में बच गया था. कार्टून का शीर्षक दिया है - "यह यूरोप के ईसाई होने का सबूत है."

कुछ मीडिया संगठनों ने कहा है कि पत्रिका सिर्फ यूरोप के पाखंड और उपभोक्तावाद को उजागर करने की कोशिश कर रही है. शार्ली एब्दो की प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि उन्हें इसके खिलाफ दायर किसी शिकायत की कोई जानकारी नहीं है. पत्रिका आर्थिक रूप से संकट में है और प्रति सप्ताह इसकी मात्र 30,000 प्रतियां बिक रही हैं जबकि पहले लाखों बिकती थीं.

ऋतिका राय (रॉयटर्स)

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