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दुनिया

आम नागरिकों की मौत के विरोध में कश्मीर बंद

कश्मीर में मंगलवार को सुरक्षा बलों और विद्रोहियों के बीच हुये संघर्ष में तीन लोगों की मौत हो गई थी. अलगाववादी संगठनों ने आम नागरिकों की मौत के विरोध में कश्मीर शट डाउन की अपील की. अब इस मसले पर राजनीति गर्मा गयी है.

भारतीय कश्मीर की पुलिस के मुताबिक मंगलवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गयी थी. बडगाम जिले के एक गांव में पुलिस ने एक घर को घेर लिया था. पुलिस को उस घर में एक आतंकवादी के छुपे होने की खबर मिली थी. लेकिन स्थानीय लोग उसका बचाव कर रहे थे. उसके समर्थन में लोग सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंक रहे थे और आजादी के नारे लगा रहे थे. पुलिस और विद्रोहियों के बीच हुये इस संघर्ष में तीन लोगों की मौत हो गई और 17 अन्य घायल हो गये. भीड़ को तितर-बितर करने के लिये पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. घर में छिपे आतंकवादी को भी मार गिराया गया.

राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस घटना पर दुख जताते हुये कहा कि सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई इस झड़प में स्थानीय लोगों ने मुश्किलें खड़ी कीं और उसमें आम लोगों की भी जान चली गयी. उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को एनकाउंटर से दूर रखें. कश्मीर के मुख्य अलगाववादी गठबंधन, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने नागरिक हत्याओं के विरोध में बुधवार को शटडाउन का आह्वान किया. अलगाववादियों की हड़ताल के मद्देनजर संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. हड़ताल के चलते दुकानें, दफ्तरों और शैक्षणिक संस्थानों को भी बंद रखा गया.

मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर में पिछले तीन दशकों से चल रही हिंसा के चलते लोगों को भारी क्षति पहुंची है. विपक्षी दल नेशनल क्रॉन्फेंस के नेता फारूख अब्दुल्ला ने इस पूरी घटना के लिये राज्य की पीडीपी-भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि राज्य में चल रहे इस रक्तपात के युग को खत्म होना चाहिये.

भारत का दावा रहा है कि भारतीय कश्मीर में पाकिस्तान अलगाववादी संगठनों को बढ़ावा देता है लेकिन पाकिस्तान हमेशा इस दावे को नकारता आया है.

एए/आरपी (डीपीए,पीटीआई)

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