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दुनिया

आप्रवासी भारतीयों के लिए कुछ राहत

अमेरिका में लाखों अवैध कामगारों पर लटकती निर्वासन की तलवार ओबामा ने हटा दी है और इसमें उन भारतीयों को भी लाभ होगा जो वहां विभिन्न उद्योगों में लगे हैं और कानूनी रूप से स्थायी दर्जा हासिल करना चाहते हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने व्यापक आप्रवासन यानि इमीग्रेशन सुधारों का एलान करते हुए कांग्रेस और विपश्री रिपब्लिकन पार्टी के कड़े विरोध की भी परवाह नहीं की. इस फैसले से एच-1बी वीजा की जटिल और लगभग यातना भरी प्रक्रिया से भी अमेरिका में वैध स्थायी दर्जा (एलपीआर) के इच्छुकों को शायद कुछ मुक्ति मिल सके, ऐसी उम्मीद भी की जा रही है.

ओबामा की यह योजना अमेरिकी नागरिकों और कानूनी तौर पर स्थायी निवासियों के माता-पिता को देश में बिना निर्वासन के खतरे के अस्थायी तौर पर रहने देने की है. ओबामा का यह सुधार उन लोगों पर लागू होगा, जो पिछले पांच साल से अमेरिका में हैं. इस कदम से उन कुशल कामगारों और उनके जीवनसाथियों को काम करने का अधिकार मिलता है, जो फिलहाल एलपीआर मिलने का इंतजार कर रहे हैं.

प्यू रिसर्च की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि अमेरिका में रहने वाले कुल गैरकानूनी इमीग्रेंटस में से चार फीसदी लोग भारतीय हैं. अमेरिका में ऐसे कुल इमीग्रेंटस की संख्या एक करोड़ से कुछ ज्यादा बताई जाती है और इसमें से गैरकानूनी इमीग्रेंट भारतीय हैं, साढ़े चार लाख. भारतीय आप्रवासियों में से करीब तीस लाख ऐसे लोग हैं जो पढ़े-लिखे और उच्च श्रेणी की नौकरियों में हैं.

आप्रवासन कानून में बदलावों की घोषणा से अमरीका में गैरकानूनी तरीके से रह रहे भारतीयों की जिंदगी भी बदल सकती है. अस्थायी दस्तावेज के सहारे वे कानूनी रूप से अमेरिका में प्रवास के लिए उपयुक्त माने जाएंगें. आप्रवासन नीति से जुड़े कुछ कानूनों को लेकर भी भारतीयों की अपनी चिंताएं हैं. विशेषकर स्टेम कानून जिसके तहत विज्ञान, तकनीकी, इंजीनियरिंग और गणित में उच्च स्तर की डिग्री वाले विदेशी छात्रों को ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया तेज हो पाएगी. स्टेम कानून से देश के हिसाब से ग्रीन कार्ड कोटा निर्धारित करने की नीति भी स्वतः समाप्त हो जाएगी.

कहा जा रहा है कि नए एलान से ओबामा का ध्यान लातिन और हिस्पानिक मतदाताओं के वोट पक्के करने पर है और भारतीय मतदाताओं की संख्या उनके मुकाबले कम ही है. उनमें से वोट देने वालों की संख्या तो और भी कम है. इस लिहाज से कुछ भारतीय उद्योगों के लिए इमीग्रेशन की नीति दुधारी तलवार भी हो सकती है. एच-1बी वीजा के गेस्ट वर्कर कोटा तो कुछ बढ़ जाएंगे लेकिन उसके साथ कुछ कड़े नियम भी जुड़ेगें. वर्क परमिट वीजा को लेकर भी भारतीय कंपनियों की चिंताएं बनी हुई हैं. माना जाता है कि ऐसे वीजा को खारिज करने की दर बढ़ी है.

ओबामा के फैसले से कहीं खुशी तो कहीं रोष भी है. सिलिकॉन वैली के नुमायंदे ओबामा की इस घोषणा से बहुत खुश नहीं है, उनका कहना है कि ये झुनझुना आकर्षक तो है लेकिन क्या ही अच्छा होता कि एच-1बी वीजा और ग्रीन कार्ड देने की प्रक्रिया को और तेज किया जाता. भारतीयों के लिए यह प्रकट तौर पर लाभकारी तो बताया जा रहा है लेकिन इस नयी नीति में ग्रीन कार्ड के दावेदारों का इंतजार कब खत्म होगा, यह स्पष्ट नहीं है.

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