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दुनिया

आपस में सुलझायें अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर टिप्पणी करते हुये कहा कि दोनों पक्षों को बातचीत कर कोर्ट के बाहर इस मुद्दे को सुलझाना चाहिये.

भारत के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने कहा कि इस मसले में वह मध्यस्थता करने को भी तैयार हैं. उन्होंने कहा कि अगर दोनों पक्ष आपसी बातचीत से कोई हल नहीं निकाल पाते, तो फिर कोर्ट इस मामले पर सुनवाई के बाद फैसला दे सकता है. लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों का बातचीत के लिये साथ बैठना ठीक रहेगा.

उन्होंने कहा अगर दोनों पक्ष चाहेंगे तो सुप्रीम कोर्ट का कोई अन्य जज भी इस मामले में जरूरत पड़ने पर मध्यस्थता करने के लिए मुहैया कराया जायेगा. बेंच ने जोर दिया कि दोनों पक्षों को "कुछ देना और कुछ लेना" के दृष्टिकोण कर काम करते हुये गंभीर और सार्थक रुख अपनाना होगा.

जस्टिस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि न्यायिक आदेश पक्षों को बाध्य कर सकते हैं लेकिन संवेदनशील मामले वार्ता के जरिये ही बेहतर ढंग से सुलझाये जा सकते हैं. बेंच ने कहा कि यह मामला धर्म और आस्था से जुड़ा हुआ है, इसलिए दोनों पक्ष आपस में बैठें और बातचीत के जरिये हल निकालने की कोशिश करें.

बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कोर्ट से कहा था कि इस लंबित मामले की जल्द सुनवाई कर फैसला सुनाया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी से इस मामले में 31 मार्च को दोबारा  अपना पक्ष रखने को कहा है. साल 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित स्थल को तीन हिस्सों में विभाजित किये जाने की बात कही थी. फिर फिर मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया.

1992 में उग्र हिंदुओं ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया था. इस घटना के बाद देश के कई हिस्सों में दंगे हुए. कई हिंदू संगठनों का कहना है कि पहले इस जगह पर राम मंदिर था जिसे तोड़ कर मुगल बादशाह बाबरी में एक मस्जिद बनवाई. बीजेपी के कई नेताओं पर बाबरी मस्जिद ढहाने के लिये भीड़ को उकसाने जैसे आरोप लगते रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में लगातार इस मुद्दे की गूंज सुनाई देती रही है. 

 

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