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खेल

आनंद को शह देते कार्लसन

शतरंज की दुनिया के बेताज बादशाह विश्वनाथन आनंद अपने ही घर में जबर्दस्त दबाव के बीच विश्व चैंपियनशिप में उतर रहे हैं. 22 साल के नॉर्वे के मैगनस कार्लसन उनके लिए बहुत बड़ा खतरा बताए जा रहे हैं.

ग्रैंडमास्टर कार्लसन दुनिया के पहले नंबर के शतरंज खिलाड़ी हैं, जबकि आनंद के नाम 2007 से लगातार विश्व चैंपियनशिप है. 12 बाजियों का दौर शनिवार से भारत के चेन्नई शहर में शुरू हो रहा है, जो करीब तीन हफ्ते तक चलेगा. आनंद ने पिछले साल मॉस्को में अपना पांचवां खिताब जीता है. हालांकि जानकारों की राय है कि आनंद की बादशाहत इस बार उनके ही देश में टूट सकती है.

तीन हफ्तों के मुकाबले में 12 बाजियां होनी हैं और अगर इसमें नतीजा नहीं निकलता, तो फिर टाई ब्रेकर से नतीजा निकल सकता है. कार्लसन पूरे भरोसे से कह रहे हैं कि वह इस मुकाबले के लिए तैयार हैं, "मैं सभी मुकाबलों में बहुत अच्छा खेलने की उम्मीद करता हूं. यहां भी ऐसी ही बात है." कार्लसन ने यह नहीं बताया कि वह किन लोगों से सलाह ले रहे हैं, जबकि आनंद ने बिना झिझके बता दिया कि वह भारतीय ग्रैंडमास्टर के ससिकिरन और संदीपन चंदा के अलावा हंगरी के पीटर लेकौ और पोलैंड के रादोस्लाव वोत्यासेक से राय मशविरा करते हैं. उनके इस बयान के बाद कार्लसन ने प्रेस की मौजूदगी में कहा, "अपनी टीम बताने के लिए आपका शुक्रिया, आनंद. लेकिन मैं ऐसा नहीं करूंगा."

बचपन से दिग्गज आनंद

क्रिकेट के दीवाने देश भारत में अगर क्रिकेट से बाहर का कोई खिलाड़ी ज्यादा लोकप्रिय है, तो वह विश्वनाथन आनंद ही हैं. 43 साल के आनंद का कहना है कि वह अपने गृह शहर में शतरंज की इस बिसात को निपटाने के लिए तैयार हैं, "अपने शहर में खेलना अलग तरह का अनुभव है. मेरी अच्छी तैयारी हुई है और मैं खेलने के लिए तैयार हूं." यह पूछे जाने पर कि क्या उनका अनुभव बहुत काम आएगा, उन्होंने कहा, "मैं अपने अनुभव से ही कुछ हासिल करना चाहता हूं. यह मेरी बहुत बड़ी ताकत है."

दोनों ही खिलाड़ियों ने अपने किशोर उम्र में ही शतरंज की दुनिया में बड़ा नाम किया है. आनंद जब 15 साल के थे, तो वह अंतरराष्ट्रीय मास्टर बने, 16 की उम्र में भारत के चैंपियन, विश्व जूनियर खिताब 17 में और 18 साल में ग्रैंडमास्टर बन गए.

हालांकि कार्लसन उनसे भी आगे हैं. वह तो सिर्फ 13 साल की उम्र में ही ग्रैंडमास्टर बन गए और 19 साल की उम्र में वह दुनिया के पहले नंबर के शतरंज खिलाड़ी हो गए. वह सबसे कम उम्र के पहलं नंबर के खिलाड़ी हैं. इस साल कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने के बाद उन्होंने विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद से भिड़ने का अवसर हासिल किया. आनंद भले ही चेन्नई के हैं लेकिन वह अपनी पत्नी और बेटे के साथ स्पेन में रहते हैं. इस मुकाबले से पहले वह कार्लसन से वरीयता में 95 अंक पीछे चल रहे हैं. लंबे वक्त तक पहले नंबर पर रहने वाले आनंद इन दिनों विश्व के आठवें नंबर के शतरंज खिलाड़ी हैं.

हार चुके हैं आनंद

इस साल जून में आनंद और कार्लसन की भिड़ंत मॉस्को में ताल मेमोरियल टूर्नामेंट में हुई, जिसमें आनंद कुछ ही घंटों में पराजित हो गए. इसके बाद उन्होंने कहा था कि इतना तजुर्बा होने के बाद भी इस तरह हारना "शर्मिंदगी" की बात है और नॉर्वे के खिलाड़ी "जबरदस्त और खतरनाक" हैं.

जानकारों का कहना है कि आनंद पर अब उम्र का असर दिखने लगा है और यह बात और ज्यादा सामने तब आती है, जब उनके सामने उनसे 21 साल छोटा खिलाड़ी होता है. उनके मुताबिक कार्लसन को मनोवैज्ञानिक तौर पर बढ़त हासिल है. रूस के व्लादीमीर क्रैमनिक का कहना है, "शतरंज का खेल फुटबॉल या दूसरे खेलों की तरह नहीं हैं, लेकिन फिर भी अगर आप अपने सामने वाले से बहुत ज्यादा उम्र के हैं, तो उसका असर पड़ता है." क्रैमनिक को हरा कर आनंद ने 2008 में विश्व शतरंज प्रतियोगिता जीती थी.

क्रैमनिक का कहना है, "कार्लसन के पास बहुत ज्यादा ऊर्जा है, वह ज्यादा प्रेरित हो सकते हैं क्योंकि वह अभी तक विश्व चैंपियन नहीं बने हैं. मैं तो कहता हूं कि आनंद उनके सामने सहज नहीं हो पाते हैं, वे कार्लसन ने डरते हैं."

बारह बाजियों के दौर में हर जीत के लिए एक अंक और ड्रॉ के लिए आधा अंक दिया जाएगा. इस तरह पहले 6.5 अंक हासिल करने वाला चैंपियन होगा. लेकिन 26 नवंबर को 12 बाजियों के बाद भी नतीजा नहीं निकला, तो 28 नवंबर को टाई ब्रेकर या सडन डेथ से विजेता का फैसला होगा.

एजेए/एनआर (एएफपी)

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