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जर्मन चुनाव

आदर्श घोटाले में सीबीआई को फटकार

अदालती फटकारों की आदी हो चुकी भारत की केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को एक बार फिर कोर्ट की खरी खोटी सुननी पड़ी है. आदर्श सोसाइटी घोटाले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सीबीआई को डांटते हुए कहा है कि वह एफआईआर दर्ज करे.

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हाई कोर्ट ने सख्त लहजे में सीबीआई से कहा, ''प्रारंभिक जांच शुरू किये हुए दो महीने से ज्यादा हो चुके हैं. अब तक आपने एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की.'' दो जजों की बेंच ने सीबीआई के रिजनल ज्वाइंट डायरेक्टर को भी नोटिस जारी किया. उन्हें दो हफ्ते बाद मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में हाजिर रहने का आदेश दिया गया है.

बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक सीबीआई को आदर्श सोसाइटी की प्रारंभिक जांच दो हफ्ते के भीतर करनी होगी. इसके बाद जांच एजेंसी को एफआईआर दर्ज करने का फैसला करना होगा. और अदालत को जांच की रफ्तार के बारे में सूचित करना होगा.

मुंबई के कोलाबा इलाके में बनी आदर्श सोसाइटी पिछले साल विवादों में आई. सोसाइटी कारगिल युद्ध में मारे गए सैनिकों के परिवारजनों के लिए बनाई जानी थी. लेकिन जांच में पता चला कि सोसाइटी के फ्लैट बड़े नेताओं, अधिकारियों और सैन्य अफसरों ने हथिया लिए. कुछ फ्लैट महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के रिश्तेदारों को भी मिले. बाद में विवाद के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों को फ्लैट खाली करने पड़े और चव्हाण को भी सीएम की गद्दी छोड़नी पड़ी.

अदालती कार्रवाई के इतर अब इस 31 मंजिला इमारत का भविष्य अंधकारमय दिख रहा है. रविवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश इसे गिराने की सिफारिश कर चुके हैं. रमेश के मुताबिक सोसाइटी तटीय इलाकों में निर्माण और पर्यावरण के नियमों को तोड़ती है. अपनी रिपोर्ट में रमेश ने कहा है, ''आदर्श सोसाइटी को तोड़ देना चाहिए क्योंकि यह पर्यावरण संबंधी नियमों की अवलेहना करती है.'' पर्यावरण मंत्रालय ने सोसाइटी को पहले नोटिस भी दे चुका है. नोटिस में पूछा गया कि सोसाइटी की अवैध मंजिलों को क्यों नहीं गिराया जाना चाहिए.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ओ सिंह

संपादन: एन रंजन

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