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दुनिया

आत्महत्या रोकने के लिए किसान यूनिवर्सिटी

ऐसे समय में जब किसानों पर कर्ज बढ़ रहा है और भारत के विभिन्न हिस्सों से आत्महत्याओं के मामले सामने आ रहे हैं, महाराष्ट्र की सरकार किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए एक यूनिवर्सिटी बनाने की योजना पर काम कर रही है.

दिलचस्प यह है कि प्रस्तावित यूनिवर्सिटी में लोगों को आधुनिक खेती के गुर सिखाने के बदले किसानों और कारीगरों को वैकल्पिक कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा. महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र किसानों की आत्महत्या के लिए बदनाम है. इस समस्या से निपटने के लिए सरकार कई योजनाएं शुरू करने जा रही है. इसी के तहत किसानों के लिए यूनिवर्सिटी शुरू करने की योजना पर भी काम चल रहा है. इस यूनिवर्सिटी को औपचारिक रूप से 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर शुरू करने की योजना है.

यूनिवर्सिटी में सीखेंगे किसान

ग्राम स्वराज और स्थानीय कौशल को निखारने के लिए स्थापित होने वाली इस प्रस्तावित यूनिवर्सिटी का नाम "गाँधी विनोबा कौशल पीठ" रखा जायेगा. यूनिवर्सिटी का ब्लू प्रिंट तैयार करने की जिम्मेदारी महाराष्ट्र सरकार की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति को सौपीं गयी है जिसके मुखिया विनय सहस्रबुद्धे हैं. इस यूनिवर्सिटी का सपना बुनने वाले विनय सहस्रबुद्धे ने डॉयचे वेले से बात करते हुए कहा कि तकनीकी तौर पर इसे यूनिवर्सिटी का दर्ज़ा मिले या न मिले पर स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा उन्नयन में यह केंद्र उपयोगी साबित होगा. इस केंद्र में विदर्भ के किसानों को सीखने और कमाने के लिए काफी कुछ होगा.

इस यूनिवर्सिटी में किसानों को कृषि और उससे जुड़े व्यवसाय के अलावा कुछ अन्य स्किल का प्रशिक्षण दिया जायेगा. विनय सहस्रबुद्धे ने बताया, "इस यूनिवर्सिटी में ऐसे कोर्स डिजाइन किए जायेंगे जो प्रशिक्षु किसान को रोजगार के दूसरे विकल्प मुहैया कराएंगे." विनय सहस्रबुद्धे का कहना है कि अक्टूबर से लेकर अगले मॉनसून तक किसान अमूमन खाली रहते हैं. इस दौरान किसानों की निष्क्रिय पड़ी उर्जा का उपयोग आय अर्जन के लिए हो सकता है. यूनिवर्सिटी इस सीजन-विशेष में विशेष कोर्स चलाएगी. यहां प्रशिक्षित होकर किसान न केवल कुछ नए स्किल सीखेंगे बल्कि अपने खाली समय में कमाई भी कर सकेंगे. यूनिवर्सिटी में किसानों के लिए कारपेंटरी, बांस की कारीगरी, मधुमक्खी पालन, पॉटरी, राजगीरी जैसे पाठ्यक्रम चलाए जाएंगे.

ग्राम स्वराज और आधुनिक बाजार

महात्मा गांधी और उनके आध्यात्मिक उत्तराधिकारी विनोबा भावे के जीवन दर्शन को सामने रखकर स्थापित हो रही यह यूनिवर्सिटी स्थानीय प्रतिभा को बाज़ार से जोड़ने का काम करेगी. स्थानीय कलाकार को व्यावसायिक तौर तरीकों से परिचित कराकर आधुनिक बाजार तक उनकी कला को पहुंचाया जाएगा. यहां से प्रशिक्षित और सर्टिफिकेट प्राप्त किसान, कारीगर या कलाकार को रोजगार शुरू करने या उसे विस्तार देने के लिए आसानी से बैंक ऋण मिल सकेगा.

महात्मा गांधी द्वारा स्थापित सेवाग्राम ही इस यूनिवर्सिटी की गतिविधियों मुख्य केंद्र होगा. जब तक प्रस्तावित यूनिवर्सिटी की स्थापना नहीं हो जाती तब तक इसे स्किल संसाधन केंद्र के रूप में चलाया जाएगा और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज को मजबूती देने का काम किया जाएगा. यह सेंटर इसी साल अस्तित्व में आ जायेगा. यह सेंटर महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट फॉर रूरल इंडस्ट्रियलाइजेशन के सहयोग से संचालित होगा.

बदहाल किसानों की चिंता

महाराष्ट्र में किसानों की बढ़ती आत्महत्या चिंता पैदा कर रही है. पिछले दिनों बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि किसानों के कल्याण की योजनाएं केवल कागजी न हों, उन्हें क्रियान्वित भी किया जाए. अकेले महाराष्ट्र में पिछले साल आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या 1000 तक पहुंच गयी.सरकार ने यह भी माना कि आत्महत्याओं के मामले पिछले वर्षों के मुकाबले बढ़े हैं. किसानों की समस्या से निपटने के लिए कोर्ट ने सरकार को कॉर्पोरेट सेक्टर के सामाजिक उत्तरदायित्व के इस्तेमाल का सुझाव दिया.

ऐसा नहीं कि सिर्फ महाराष्ट्र के किसान ही आत्महत्या कर रहे हैं. दूसरे राज्यों से भी किसान आत्महत्या की खबरें आती रहती हैं. गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान और यहां तक कि कभी अपनी संपन्नता के लिए मशहूर पंजाब के किसान भी अब आत्महत्या जैसे घातक क़दम उठा रहे हैं. पंजाबी विश्वविद्यालय के हाल के एक सर्वे के अनुसार प्रांत के किसानों पर 690 अरब रुपये का कर्ज है. किसानों के लिए यूनिवर्सिटी बनाने की योजना को सकारात्मक बताते हुए समाजशास्त्री डॉ साहेब लाल कहते हैं कि खेती पर निर्भरता कम करने के लिए "किसानों को खेती के साथ-साथ वैकल्पिक रोजगार के लिए भी तैयार करना होगा."

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