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दुनिया

आत्मघाती हमलों के बाद मिस्र में आपातकाल घोषित

उत्तरी मिस्र में दो कॉप्टिक चर्चों पर हुए आत्मघाती हमलों की चपेट में आकर कम से कम 43 लोग मारे गए हैं. राष्ट्रपति अल-सीसी ने किया तीन महीने के आपातकाल का एलान.

रविवार को पाम संडे का विशेष दिन मना रहे मिस्र के दो गिरजाघरों पर आत्मघाती हमले हुए. कॉप्टिक चर्चों पर हमले की जिम्मेदारी आतंकी गुट इस्लामिक स्टेट ने ली है. हमले में कम से कम 43 लोगों की जान चली गयी और 100 से अधिक घायल हुए हैं. दो गिरजों पर विस्फोट कर लोगों को मारने की जिम्मेदारी आतंकी गुट इस्लामिक स्टेट ने ली है.

इसके बाद मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने तीन महीने के आपातकाल की घोषणा कर दी है. नील नदी के डेल्टा क्षेत्र में स्थित मिस्र के शहरों टांटा और अलेक्सांड्रिया में यह हमले हुए. इसके पहले दिसंबर में भी मिस्र की राजधानी काहिरा में एक चर्च पर हमला हुआ था जिसमें 29 लोग मारे गए थे. इसी महीने कैथोलिक गिरजे के प्रमुख पोप फ्रांसिस का मिस्र आने का कार्यक्रम है.

राष्ट्रपति सीसी ने देश में "तीन महीने" का आपातकाल घोषित कर दिया है. इसके लागू होने के लिए एक हफ्ते के भीतर उन्हें संसद से इस प्रस्ताव पर मंजूरी लेनी होगी. हमले के बाद सीसी ने कहा कि जिहादियों के खिलाफ ये लड़ाई "लंबी और दर्दनाक होगी."

पहला बम विस्फोट टांटा शहर के गिरगिस चर्च पर हुआ, जहां कम से कम 27 लोग मारे गए. दूसरा विस्फोट सेंट मार्क्स चर्च पर हुआ जहां चार पुलिसकर्मियों समेत कम से कम 17 लोग मारे गए. ये दोनों हमले आत्मघाती हमलावरों ने अंजाम दिए. सोशल मीडिया पर आईएस ने ऐसे और हमले करने की भी चेतावनी दी है.

गिरजों में जमा होकर लोग पाम संडे का पावन दिन मना रहे थे, जिसे ईसाई कैलेंडर में एक पवित्र दिन माना जाता है. मिस्र में 2012 से पहले भी लंबे समय तक इमरजेंसी कानून लागू रहे हैं. इसमें पुलिस को विशेष अधिकार मिल जाते हैं और वे किसी की भी निगरानी या गिरफ्तारी कर सकते हैं.

कॉप्ट लोग, मिस्र की कुल आबादी का दसवां हिस्सा हैं. पिछले कुछ महीनों में इस अल्पसंख्यक समुदाय पर कई बार हमले हुए हैं. जिहादी और इस्लामी कट्टरपंथी कॉप्टिक लोगों को जुलाई 2013 के सैनिक तख्तापलट के समर्थक मानते हैं, जिसमें कट्टरपंथी राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी को पद से हटा दिया गया था. उस समय सेना प्रमुख सीसी ने मोर्सी को हटाकर पद पर कब्जा किया था.

आरपी/एके (एएफपी)

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