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दुनिया

आतंकी हमले की तैयारी के आरोप में जर्मन सैनिक गिरफ्तार

जर्मनी में आतंकवादी हमले की तैयारी करने के शक में एक सैनिक को गिरफ्तार किया गया. संदिग्ध, शरणार्थियों के बीच घुसकर आतंकवादी हमला करने की योजना बना रहा था.

28 साल के सैनिक को जर्मन सेना के बेस से गिरफ्तार किया गया. वह हामेलबुर्ग के आर्मी बेस में ट्रेनिंग कर रहा था. संदिग्ध को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने जर्मनी, ऑस्ट्रिया और फ्रांस में 16 जगहों पर छापे भी मारे. इस दौरान कई सबूत मिले हैं. जांचकर्ताओं को शक है कि संदिग्ध विदेशियों से नफरत करता है. इसी नफरत के कारण वह शायद आप्रवासियों और शरणार्थियों पर हमला करने की योजना बना रहा था.

फ्रैंकफर्ट में अभियोजन पक्ष ने बताया कि संदिग्ध ने खुद फर्जी तरीके से सीरियाई शरणार्थी के तौर पर रजिस्टर भी कराया था. संदिग्ध पर जर्मनी में लंबे समय से नजर रखी जा रही थी. जनवरी में उसे ऑस्ट्रिया की राजधानी के वियना के एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया. तब उसने एयरपोर्ट के बाथरुम में लोडेड हथियार छुपाया था. लेकिन बाद में उसे रिहा कर दिया गया. इसके बाद फरवरी में संदिग्ध जर्मनी लौटा.

लेकिन इस दौरान जांचकर्ताओं को पता चला कि उसके फिंगरप्रिंट, जर्मनी में रजिस्टर एक शरणार्थी से मेल खा रहे हैं. गहरी खोजबीन करने पर पता चला कि सैनिक ने 2015 में खुद को जर्मनी में सीरियाई शरणार्थी के तौर पर रजिस्टर भी कराया था. 2016 की शुरुआत में उसने शरण का आधिकारिक रूप से आवेदन किया, इसके बाद उसे सरकार से वित्तीय मदद और रहने की जगह भी मिली. खुद को शरणार्थी बताते वक्त वह जरा भी अरबी नहीं बोलता था, बल्कि धारा प्रवाह फ्रेंच बोलता था. लेकिन इसके बावजूद किसी अधिकारी को उस पर शक नहीं हुआ.

अभियोजन पक्ष को संदेह है कि संदिग्ध सैनिक वियना एयरपोर्ट पर छुपाये गये गैरकानूनी हथियार से गंभीर अपराध को अंजाम देना चाहता था. पुलिस ने संदिग्ध के घर के पास 24 साल के एक छात्र को भी गिरफ्तार किया है. उग्र दक्षिणपंथी पृष्ठभूमि वाले छात्र के घर से हथियार और विस्फोटक कानून के तहत प्रतिबंधित चीजें भी मिली हैं.

जांचकर्ताओं के सामने अभी पूरी तस्वीर साफ नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि ये दोनों संदिग्ध हमला और फिर उसका दोष शरणार्थियों पर डालने की फिराक में थे.

जर्मन सेना की काउंटरइंटेलिजेंस सर्विस फिलहाल सेना में घुसे उग्र दक्षिणपंथियों के 275 मामलों की जांच कर रही है. सेना के भीतर इस्लामिक कट्टरपंथियों और वामपंथी चरमपंथियों के होने के भी करीब एक दर्जन मामलों की जांच चल रही है.

(जर्मनी पर आतंक के साए)

ओएसजे/आरपी (एएफपी, डीपीए)

 

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