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दुनिया

आतंकवाद का नया गढ़

मिस्र के सिनाई इलाके में ऐसे कई आतंकवादी गुट हैं जो अल कायदा से जुड़े हुए हैं. मुर्सी सरकार गिरने के बाद अब वहां के गुटों पर कार्रवाई आसान हो सकती है.

मिस्र की राजधानी काहिरा और अलेक्सेंड्रिया में सुरक्षा स्थिति नाजुक है. सिनाई प्रायद्वीप में हथियारबंद गुट रोजाना पुलिसकर्मियों, सैनिकों और आम लोगों को मार रहे हैं. 18 जुलाई की रात को तीन पुलिसकर्मियों की इन हमलों में मौत हो गई. राष्ट्रपति मुर्सी को पद से हटाए जाने के बाद से सुरक्षाकर्मी देश को नियंत्रण में नहीं ला पा रहे.

सुरक्षा विशेषज्ञ प्रायद्वीप के हालात पर चिंतित हैं. "पिछले दो हफ्तों में सुरक्षा का ढांचा ढह गया है." यह मानना है मध्यपूर्व राजनीति पर नजर रख रहे विश्लेषक आरोन जेलिन का. जेलिन का कहना है कि मुस्लिम ब्रदरहुड के अपदस्थ होने के बाद राजनीति में एक खालीपन आ गया है. अलग अलग गुट इस मौके का फायदा उठा रहे हैं.

सोमालिया, यमन, साहेल क्षेत्र और हिंदूकुश के बाद अब उग्रवादियों को ऑपरेशन के लिए एक और ठिकाना मिल गया है. काहिरा में अल अहराम राजनीतिक शोध संस्था के मोहम्मद फायज फरहत का कहना है कि सलाफी और जिहादी गुट इन जगहों पर संगठित हुए. 2011 की शुरुआत में हुस्नी मुबारक के पद से हटने के बाद से यह गुट सिनाई इलाके में एक इस्लामी राज्य का गठन करना चाहते हैं. वे लड़ाकों को लाते हैं और हथियार जमा करते हैं.

Ägypten Soldaten Sinai

सिनाई में मिस्र के सैनिक

गजा और सिनाई में उग्रवादियों के बीच संपर्क

पिछले सालों में कई नए इस्लामी संगठन बने हैं, जैसे जैश अल इस्लाम या अंसार बैत अल मकदीस. इनमें से कुछ के बारे में कहा जाता है कि यह अल कायदा से संपर्क रखते हैं. जेलिन सिनाई और गजा पट्टी के उग्रवादी एक दूसरे के करीब माने जाते हैं. फरहत कहते हैं, "अंसार अल शरिया या तौहीद अल जिहाद सिनाई के हैं लेकिन गजा में सलाफी जिहादियों से संपर्क रखते हैं." फलिस्तीन में हमास भी इनसे रिश्ते रखते हैं.

इलाके को अच्छी तरह जानने वाले विशेषज्ञों को भी बताना मुश्किल हो जाता है कि कौन से गुट सिनाई के दक्षिण में छिपे हैं. जेलिन कहते हैं कि लड़ाकों की संख्या और उनके सहयोगियों के बारे में केवल अनुमान लगाए जा सकते हैं, "हमें जैसी जानकारी मिलती है उससे हम पता नहीं लगा सकते हैं कि सिनाई के कुछ इलाकों में क्या हो रहा है."

अलग अलग देशों से आने वाले इस्लामी उग्रवादियों के अलावा स्थानीय हथियारबद्ध बद्दू इलाके को अस्थिर बनाते हैं. अफ्रीका और एशिया के बीच प्रायद्वीप के इलाके में यह कबीले रहते हैं. इनमें नील घाटी में रहने वाले मिस्र के लोगों में कम ही समानता है. बैरुत में कार्नेजी फाउंडेशन के यजीद सयीघ कहते हैं कि लाल सागर में पर्यटन के विकास के बाद से बद्दूओं को परेशानी होने लगी है. इनमें से कई हथियार और लोगों की तस्करी से पैसे कमाते हैं. अगर यह कबीले अल कायदा का सहयोग कर रहे हैं तो इससे खतरा बढ़ सकता है. लेकिन सयीघ कहते हैं कि अगर बद्दू पुलिसकर्मियों पर हमला करते हैं तो इसका मतलब नहीं कि वह अल कायदा के सदस्य हैं. हालांकि दोनों के बीच संपर्क तो है ही.

आतंकियों के लिए सुरक्षित

सिनाई प्रायद्वीप का रेगिस्तान उग्रवादियों को छिपने के लिए एकदम बढ़िया जगह है. मिस्र की सेना यहां कम मौजूद रहती है. 1979 में मिस्र और इस्राएल के बीच शांति समझौते के तहत सिनाई से सेना हटा दी गई थी. स्वेज नहर के पूर्वी हिस्से में मिस्र की सेना को टैंक तैनात करने की अनुमति नहीं थी. लड़ाकू विमान या हेलिकॉप्टर भी वहां लाना वर्जित था. विश्लेषक जेलिन कहते हैं कि सेना की दिलचस्पी उग्रवादियों के पीछे लगने में नहीं थी.

Ägypten Israel Grenze Sinai Wrack Militärfahrzeug

सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनाती बढ़ी

इस बीच इस्राएल में सरकार ने मिस्र को सिनाई के सीमावर्ती में सैनिकों की संख्या बढ़ाने की अनुमति दे दी है. इस इलाके में और दो बटैलियन तैनात हो चुकी हैं. यह इस्राएल के लिए भी अच्छा है. 2010 में आयलाट शहर पर रॉकेटों और ग्रेनेड से हमले हुए. यह इलाका पर्यटकों में काफी लोकप्रिय है. सिनाई से आतंकवादी हमलों में 2012 से अब तक कई इस्राएली नागरिक मारे गए हैं. 5 अगस्त 2012 का हमला बहुत जोरदार था. हथियारबंद उग्रवादियों ने मिस्र के एक सैनिक शिविर पर हमला किया. इसमें 16 सैनिक मारे गए और उग्रवादी इस्राएल की सीमा तक पहुंच गए. वहां गोलीबारी में कम से कम पांच हमलावर मारे गए. इस्राएलियों को कुछ नहीं हुआ.

विश्लेषक फरहत का कहना है कि मुर्सी की सरकार भी मिस्र की सेना के लिए ठोस फैसले नहीं ले पाई. मुस्लिम ब्रदरहुड को आंतकवाद निरोधी कार्रवाई में दिलचस्पी नहीं थी. "अब राष्ट्रपति को अपदस्थ कर दिया है और सेना सिनाई में सलाफियों और जिहादियों पर कार्रवाई के लिए आजाद है."

रिपोर्टः आंद्रेयास गोर्शेव्स्की/एमजी

संपादनः आभा मोंढे

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