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ताना बाना

आतंकवादी साजिशों को पता लगाना मुश्किल: अमेरिका

अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने माना है कि अमेरिकी जमीन पर आतंकवादी हमलों की साजिश का पता लगाने में उन्हें मुश्किलें पेश आ रही हैं. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक अल कायदा अब अमेरिकी नागरिकों को भर्ती करने की फिराक में है.

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अमेरिका में घरेलू सुरक्षा मंत्री जेनेट नेपोलिटिनो और एफबीआई के निदेशक रॉबर्ट म्यूलर ने बताया कि अल कायदा आतंकवादी अब अमेरिका के खिलाफ छोटे स्तर पर हमले करने की साजिश रच रहे हैं. इस मकसद के लिए वे ज्यादा से ज्यादा स्थानों को निशाना बनाने की फिराक में हैं आतंकवादी अमेरिका की सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए अमेरिकियों की भर्ती करने की कोशिश कर रहे हैं.

Times Square Autobombe Anschlag

नेपोलिटिनो ने बताया, "जिस तरह से यह खतरा उभार ले रहा है उससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने इन साजिशों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में नई मुश्किल खड़ी हो रही है. अमेरिका को खतरा कई देशों में फैले अलग अलग गुटों से है. खासतौर पर उन इलाकों को निशाना बनाने की साजिश हो रही है जिन्हें पूरी तरह सुरक्षा प्रदान कर पाना संभव नहीं है."

एफबीआई निदेशक रॉबर्ट म्यूलर के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान, यमन, सोमालिया और इराक में अल कायदा आतंकवादियों से अमेरिका को खास तौर पर खतरा है. म्यूलर का कहना है कि अल कायदा का असली नेतृत्व पाकिस्तान में है और ओसामा बिन लादेन उसका सरगना है. लेकिन वह यह भी मानते हैं कि अमेरिका के आतंकवादी विरोधी अभियानों से वहां अल कायदा को झटका लगा है और 2001 के बाद से गुट कमजोर हुआ है.

11 सितम्बर 2001 को न्यू यॉर्क में हुए आतंकवादी हमले में करीब तीन हजार लोगों की मौत हो गई थी जिसके चलते अमेरिका को आशंका बनी रहती है कि अल कायदा फिर से ऐसे हमलों को अंजाम दे सकता है. अल कायदा के हाथों में परमाणु बम पड़ने का खतरा बना रहता है.

नेपोलिटिनो का कहना है कि न्यू यॉर्क टाइम्स स्कवायर पर विफल कार बमला और डेट्रॉयट जा रहे विमान को उड़ाने की साजिश दिखाती है कि एक या दो आतंकवादी छोटे स्तर पर कुछ लोगों की मदद से साजिश रचकर बड़े हमले करने का मंसूबा बना रहे हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: ओ सिंह

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