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दुनिया

आठ लाख लोगों का पलायन

पाकिस्तान के उत्तरी वजीरिस्तान में तालिबान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से आठ लाख लोग अपना घर बार छोड़ चुके हैं. वहीं सेना ने मीरानशाह के 80 फीसदी इलाके को नियंत्रण में ले लिया है.

लाखों लोग उत्तरी वजीरिस्तान के कबायली इलाके को छोड़ कर पास के शहर बन्नू पलायन कर गए हैं. जून के मध्य से शुरू हुई सैनिक कार्रवाई के बाद से सैकड़ों और परिवारों ने लकी मरवत, करक और डेरा इस्माइल खान में पनाह ली है. फेडरल एडमिनिस्टर्ड ट्राइबल एरिया आपदा प्रबंधन (एफडीएमए) के अधिकारियों का कहना है कि नकली पंजीकरण की जांच की जा रही है जिससे हो सकता है कि पलायन करने वालों की संख्या में कमी पता चले.

उत्तरी वजीरिस्तान से कट्टरपंथियों को उखाड़ फेंकने के लिए पाकिस्तान सेना टैंकर, सैनिक और लड़ाकू विमान का इस्तेमाल कर रही है. पिछले कुछ सालों में कट्टरपंथियों ने देश में अनगिनत हमले अंजाम दिए हैं.

एफडीएमए के महानिदेशक अरशद खान के मुताबिक, "करीब 8,33,274 लोग या 66,726 पलायन करने वाले परिवारों ने मंगलवार शाम तक बन्नू और पेशावर शहर में पंजीकरण कराया है."

खान के मुताबिक विस्थापित लोगों में 3,61,459 बच्चे और 2,48,633 महिलाएं शामिल हैं. सेना के मुताबिक कार्रवाई में अब तक 399 आतंकी और 20 सैनिक मारे गए हैं. उत्तरी वजीरिस्तान का इलाका बाहरी लोगों के लिए कट गया है और सेना के आंकड़ों की पुष्टि करने का कोई और तरीका नहीं है. कराची एयरपोर्ट पर हमले के बाद 15 जून को सेना ने आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की. एयरपोर्ट पर हुए हमलों में 34 लोग मारे गए थे और इसी हमले के बाद तालिबान और सरकार के बीच लड़खड़ाती बातचीत का अंत हो गया.

मीरानशाह पर नियंत्रण

पाकिस्तानी सेना ने उत्तरी वजीरिस्तान की राजधानी मीरानशाह के 80 फीसदी इलाके पर नियंत्रण कर लिया है. उत्तरी वजीरिस्तान में पाकिस्तान सेना के जनरल जफरुल्लाह खान के मुताबिक, "उत्तरी वजीरिस्तान सभी तरह के आतंकियों का केंद्र और सुरक्षित ठिकाना बन गया था. लेकिन सैन्य ऑपरेशन की मदद से मीरानशाह और उससे सटे 80 फीसदी इलाके को आतंकियों से मुक्त करा लिया गया है."

इससे पहले तक शहर पर तालिबान का नियंत्रण हुआ करता था. जनरल खान का कहना है कि तालिबान और आतंकी संगठन शहर का इस्तेमाल बेस के तौर पर करते थे, वे बम धमाके और हमले की योजना बनाते थे. उत्तरी वीजरिस्तान की सीमा अफगानिस्तान से लगती है. बुधवार को सेना ने पत्रकारों के लिए इलाके की यात्रा व्यवस्था की थी. इस दौरान पत्रकारों को सुरंगों और उन जगहों को दिखाया गया जहां आतंकियों को बम बनाने और आत्मघाती हमले की ट्रेनिंग दी जाती थी. हालांकि स्थानीय नागरिकों की सूचना से यह पता चलता है कि सेना के नियंत्रण कायम करने के पहले ही आतंकी भाग निकल गए.

एए/ओएसजे (एएफपी, एपी)

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