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ताना बाना

आज का इतिहासः 26 सितंबर

1580 में आज ही के दिन ब्रिटिश नाविक फ्रांसिस ड्रेक समुद्री रास्ते से पूरे विश्व का चक्कर लगाकर वापस स्वदेश इंग्लैंड पहुंचे थे.

ड्रेक वह पहले ब्रिटिश नागरिक थे जिसने पानी के रास्ते पूरी दुनिया की परिक्रमा पूरी की थी. 13 दिसंबर, 1577 को ड्रेक ने पांच जहाजों के बेड़े के साथ इंग्लैंड से अपनी यात्रा शुरु की. अटलांटिक को पार करने के बाद ड्रेक ने अपने दो जहाज दक्षिण अमेरिका में ही छोड़ कर आगे बढ़ने का फैसला किया. बाकी तीन जहाजों के साथ सफर जारी रखते हुए ड्रेक ने मैगेलन स्ट्रेट्स को पार किया. इस बीच उन्हें कई भयंकर तूफानों से निपटना पड़ा. इसी जद्दोजहद में उनका एक और जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो गया और दूसरे को मजबूरन इंग्लैंड वापस भेजना पड़ा.

प्रशांत महासागर तक पहुंचने में ड्रेक के पास केवल एक जहाज 'गोल्डन हाइंड' ही रह गया था. बहादुर नाविक ड्रेक ने यात्रा नहीं रोकी. ड्रेक ने दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट के पास एक स्पेन के एक खजाने से भरे हुए जहाज को अपने कब्जे में ले लिया. फिर वहां से अटलांटिक में लौटने का रास्ता तलाशने की कोशिश में ड्रेक वहां तक पहुंचे जहां आज की तारीख में वॉशिंगटन है. प्रशांत महासागर में अपने बेड़े के साथ चलते हुए ड्रेक ने कई टापू देखे. अफ्रीका के एक टापू से होते हुए वह अटलांटिक में लौट आए. 26 सितंबर 1580 को गोल्डेन हाइंड इंग्लैंड के प्लेमाउथ शहर में लौट आया. उसके साथ था इस लंबी यात्रा में लूटा गया खजाना और दुनिया भर के महासागरों से जुड़ी अनगिनत जानकारी. 1581 में उनकी इस बहुमूल्य उपलब्धि के लिए ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने ड्रेक को नाइट की उपाधि से सम्मानित किया. इस महान अंवेषक का 1596 में 56 की उम्र में देहांत हो गया.

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