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दुनिया

आजादी के मौके से उम्मीद की कोशिश

लाल किले की प्राचीर से लगातार दसवीं बार जब मनमोहन सिंह की आवाज उठी तो पाकिस्तान, आतंकवाद, अर्थव्यवस्था, विकास, नक्सलवाद और दूसरे पारंपरिक मुद्दों का ही बोलबाला था, लेकिन चुनाव की आहट ने राजनीतिक सुर भी मिला ही दिया.

भारत आज आजादी की 66वीं सालगिरह मना रहा है. दिल्ली में लाल किले पर तिरंगा लहराने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश को संबोधित किया. हाल ही में नियंत्रण रेखा पर पांच भारतीय सैनिकों की मौत का मामला उठाते हुए प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने की कोशिश की. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ दोस्ती के लिए जोर लगा रहा है, "लेकिन पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधरे इसके लिए यह जरूरी है कि वो अपनी जमीन और अपने नियंत्रण वाले इलाकों का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए ना होने दे."(भारत के सब्र की सीमा है)

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि सामाजिक समरसता, सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता का ऐसा वातावरण बनाने की जरूरत है जहां समृद्धि हो और जिसमें धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा से ऊपर उठ कर सभी नागरिकों की बराबर भागीदारी हो. आंतरिक सुरक्षा के मामले पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ चिंताजनक सांप्रदायिक घटनाएं 2012 में और इस साल हुई हैं हालांकि उससे पहले के 9 साल सांप्रदायिक सौहार्द के लिहाज से बेहतर रहे हैं. प्रधानमंत्री ने ज्यादा विस्तार से जिक्र नहीं किया लेकिन समझा जाता है कि पिछले हफ्ते किश्तवाड़ में हुई घटनाओं के संदर्भ में उन्होंने यह बातें कही. मनमोहन सिंह ने कहा कि "आतंकवाद और नक्सली हिंसा में कमी आई है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा लगातार सजग रहने की मांग करता है. हम कई बार नक्सली हमलों को रोक पाने में नाकाम हुए." इसी साल मई में छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमलों को उन्होंने "लोकतंत्र पर सामने से हमला" कहा.

भारत के अर्थव्यवस्था की विकास दर पिछले दस सालों में फिलहाल सबसे कम है. प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह दौर ज्यादा दिन तक नहीं रहेगा क्योंकि उनके मुताबिक सरकार इस स्थिति से निकलने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है. पिछले नौ सालों में अर्थव्यवस्था की औसत विकास दर 7.9 फीसदी रही है. तीन साल तक लगातार 8 फीसदी रहने के बाद 2011-12 में विकास दर घट कर 6.2 फीसदी पर आ गई और इसके बाद यह और ज्यादा नीचे गिर कर 5 फीसदी पर पहुंच गई है. प्रधानमंत्री ने 8 नए हवाईअड्डे और दो बंदरगाह बनाने का भी एलान किया और कहा कि बुनियादी ढांचे के विकास के जरिए देश की अर्थव्यवस्था में तेजी वापस आएगी. बुनियादी विकास की परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में इसी साल जनवरी में निवेश मामलों की कैबिनेट कमेटी बनाई गई है.(आंकड़ों में उलझी भारत की गरीबी)

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत दुनिया में अकेला देश नहीं है जो मंदी झेल रहा है. विकसित देशों के बाजार भी बुरे दौर से गुजर रहे हैं जिससे निर्यात कम हुआ है और विकासशील देशों के विकास पर असर पड़ा है. सरकार को उम्मीद है कि इस साल विकास दर 6 फीसदी के आसपास रहेगी. प्रधानमंत्री ने कहा, "पिछले 9 सालों की औसत विकास दर बता रही है कि हम ऐसा करने में सक्षम हैं."

उत्तराखंड की आपदा का जिक्र करते हुए मनमोहन सिंह ने इस पर दुख जताया और सुरक्षा बलों के साहस भरे राहत कामों की सराहना की. उन्होंने कहा कि पूरा देश इस संकट में प्रभावित लोगों के साथ है औऱ सरकार हर संभव तरीके से मदद करने की कोशिश कर रही है.

अगले साल होने वाले आम चुनाव के पहले प्रधानमंत्री आखिरी बार लाल किले से बोल रहे थे और 30 मिनट के भाषण में राजनीति की गंध भी महसूस हुई. मनमोहन सिंह ने सांप्रदायिकता का मुद्दा उठाया और इस बहाने विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना लगाते दिखे. प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक, प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष भारत में संकीर्ण और सांप्रदायिक विचारधारा की कोई जगह नहीं है." उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की सोच समाज को "बांटेगी" और "हमारे लोकतंत्र को कमजोर करेगी." प्रधानमंत्री ने सहनशीलता बढ़ाने के लिए धर्मनिरपेक्ष परंपराओं की जरूरत पर जोर डालते हुए कहा, "मैं सभी राजनीतिक दलों, समाज के सभी वर्गों और सभी लोगों से इस दिशा में काम करने के लिए अपील करता हूं."

भारी सुरक्षा के बीच लालकिले पर स्वाधीनता दिवस के सालाना जलसे में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, संसद में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज और अरूण जेटली, रक्षा मंत्री समेत तमाम केंद्रीय मंत्री और कई विदेशी मेहमान भी शामिल हुए.

एनआर/एमजे (पीटीआई)

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