आजादी के बाद श्रीलंका में पहली रेलवे लाइन | दुनिया | DW | 13.01.2018
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दुनिया

आजादी के बाद श्रीलंका में पहली रेलवे लाइन

भारत के पड़ोस में चीन आधारभूत ढांचे का तेजी से विस्तार कर रहा है. श्रीलंका में आजादी के 70 साल बाद पहली नई रेलवे लाइन बिछ रही है. रेलवे लाइन चीन की मदद से तैयार की जा रही है.

श्रीलंका के मतारा में चीन द्वारा निर्मित मतारा-कटारागामा रेलवे विस्तार परियोजना के पहले चरण का ट्रैक बिछाने का काम शुरू हो गया है. समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, परियोजना के पहले चरण में द्वीप देश के दक्षिण में मतारा से बेलिअट्टा तक रेलवे सेवा का निर्माण शामिल है.

(कैसे दुनिया में फैल रहा चीन का रेलवे नेटवर्क)

श्रीलंका के राज्य उद्यम विकास मंत्री लक्ष्मण यपा अबेवर्दना ने एक सम्मेलन के दौरान कहा कि द्वीप देश परियोजना के पहले चरण को आने वाले महीनों में पूरा करने की आशा कर रहा है, जिससे जनता और पर्यटन को फायदा मिलेगा.

अबेवर्दना ने कहा, "राष्ट्रपति (मैत्रिपाला सिरीसेना) और श्रीलंका की सरकार की ओर से मैं इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के लिए चीन सरकार का धन्यवाद देना चाहूंगा. यह विस्तार एक ऐतिहासिक विकास है, जिससे सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र के साथ साथ देश के पर्यटन क्षेत्र को बहुत फायदा होगा."

मंत्री ने कहा, "पिछली सरकारों ने इस परियोजना को लागू करने के लिए प्रयास किए थे. चीन सरकार और चीन की कंपनियों की सहायता से यह परियोजना जल्द ही हकीकत में बदलने जा रही है."

मतारा-कतारगामा रेलवे परियोजना 1948 में द्वीप देश के आजादी प्राप्त करने के बाद श्रीलंका में बनने वाली पहली नई रेलवे लाइन है. चीन श्रीलंका ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में रेलवे प्रोजेक्ट चला रहा है. बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान में वह बंदरगाह प्रोजेक्ट भी चला रहा है. रेलेवे के जरिये चीन अफ्रीकी देशों और यूरोप तक पहुंचना चाहता है.

आईएनएस

 

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