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दुनिया

आखिर मिले भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिव

भारत और पाकिस्तान ने सुरक्षा मुद्दों पर फिर से बातचीत शुरू की है. जनवरी में पठानकोट हमले के बाद दोनों देशों के विदेश सचिवों की नई दिल्ली में पहली मुलाकात हुई. आतंकी हमले के कारण सचिव स्तरीय वार्ता को टाल दिया गया था.

भारत के विदेश सचिव एस जयशंकर और पाकिस्तानी विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी नई दिल्ली में हुए अफगानिस्तान सम्मेलन के हाशिए पर मिले. जयशंकर ने पाकिस्तानी विदेश सचिव से कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद और पाकिस्तान स्थित आतंकवादी दलों द्वारा भारत पर निशाना साधने पर नकार में नहीं रह सकता. उन्होंने पठानकोट में हुए हमले पर जल्द और दिखने वाली प्रगति की आवश्यकता पर बल दिया.

नई दिल्ली में 90 मिनट तक चली बातचीत में जयशंकर ने चौधरी से कहा कि पाकिस्तान में स्थित आतंकी दलों को सजा के डर के बिना वहां से ऑपरेट करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए. पाकिस्तान ने पठानकोट हमले की चर्चा नहीं की लेकिन विदेश सचिव ने बलूचिस्तान में भारतीय खुफिया एजेंसी की भूमिका पर चिंता व्यक्त की. पाकिस्तानी दूतावास के एक बयान में भारत के कथित खुफिया अधिकारी की गिरफ्तारी पर चिंता व्यक्त की.

भारत का आरोप है कि पाकिस्तानी उग्रवादियों ने पठानकोट के वायु सैनिक अड्डे पर 2 जनवरी को हमला किया था जिसमें सात सैनिक अधिकारी मारे गए थे. भारत मुंबई आतंकी हमलों के लिए भी पाकिस्तान स्थिति उग्रवादी दलों को जिम्मेवार मानता है और उन पर कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है. 2008 के मुंबई हमले में 166 लोग मारे गए थे.

इसके विपरीत पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर बातचीत की मांग करता रहा है. अभी भी उसने एक बयान जारी कर कश्मीर मुद्दे को मुख्य मुद्दा बताते हुए उसके न्यायोचित समाधान की मांग की है. भारत कश्मीर पर बातचीत से पहले आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान का स्पष्ट रवैया देखना चाहता है और भारत पर हमले करने वाले उग्रपंथियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रहा है.

कश्मीर 1947 में आजादी के बाद से ही परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसियों भारत और पाकिस्तान के विवाद के केंद्र में है. दोनों देश कश्मीर पर तीन युद्ध लड़ चुके हैं और विभाजित प्रांत के एक-एक हिस्से पर उनका अधिकार है लेकिन दोनों ही देश पूरे कश्मीर को अपना अभिन्न अंग बताते हैं. पाकिस्तान जम्मू और कश्मीर में चल रहे अलगाववादी आंदोलन को समर्थन दे रहा है.

एमजे/आईबी (डीपीए, पीटीआई)

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