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जर्मन चुनाव

आखिरी खनिक के आने तक कोई नहीं जाएगा

चिली में जिस खदान के अंदर 33 मजदूर 69 दिन तक फंसे रहे, उसके बाहर उनके परिवार वालों, रिश्तेदारों और अन्य लोगों ने टेंट लगा रखे हैं. इन टेंटों का एक शहर सा बस गया है. और यहां कुछ अजीब रिश्ते बन गए हैं.

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टेंटों के इस शहर को कैंप होप यानी उम्मीदों का कैंप कहा जाता है. यह कैंप अब अनूठी मानवीय सद्भावना का कैंप बन गया है.

इस कैंप में उन सभी 33 मजदूरों के परिवार हैं जो खदान में फंसे हुए थे. उनमें से 20 अब बाहर आ चुके हैं लेकिन सभी 33 परिवार तब तक वहीं रहेंगे जब तक कि सारे खनिक बाहर नहीं आ जाते. उनका कहना है कि आखिरी आदमी के बाहर आ जाने तक कैंप होप वहीं बसा रहेगा. पिछले 10 हफ्तों से एक साथ दुआ मांग रहे इन लोगों के बीच उम्मीद का एक ऐसा रिश्ता बन गया है जो आपस में उन्हें बांधे हुए है.

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इसलिए जिन लोगों की दुआ पूरी हो चुकी है वे अब अपने अन्य साथियों के लिए दुआ कर रहे हैं.

बाहर निकले 11वें खनिक योर्गे गैलेगुइलोस के भाई जेवियर ने कहा, "जो पहला आदमी बाहर आया वह हमारे परिवार का नहीं था. लेकिन तब भी उसका बाहर आना हमारे लिए खुशी का सबब था. अब तो हम आखिर तक यहीं रहेंगे."

गैरेगुइलोस परिवार सभी के साथ मिलकर योर्गे के बाहर आने का इंतजार करता रहा. हर शख्स के बाहर आने पर सभी ने तालियां बजाईं. हालांकि शुरुआत में तनाव और घबराहट ने सबको घेरे रखा. लेकिन जैसे जैसे लोग बाहर आने लगे घबराहट दूर होती गई. खुशी से चिल्लाते जेवियर ने कहा, "इस बात से बड़ी तसल्ली मिली कि सब कुछ ठीकठाक चल रहा है."

इन 33 खनिकों में से एक, कार्लोल मामानी बोलीविया के हैं. मामानी के दोस्त एडविन मितमिता उनके बाहर आने के बावजूद वहां रुके हुए हैं और कहते हैं कि वह आखिरी मजदूर के बाहर आ जाने के बाद ही वहां से जाएंगे. इसलिए आधे से ज्यादा खनिकों के बाहर आने के बावजूद एक भी टेंट अब तक नहीं उखड़ा है.

इन लोगों ने उम्मीदों और दुआओं का ही नहीं डर का वक्त भी एक दूसरे का हाथ पकड़े बिताया है. उन पहली 16 रातों तक जब पता नहीं चल पाया था कि कोई खनिक जिंदा भी है या नहीं, ये लोग वहीं खदान के बाहर एक दूसरे के सहारे ही उस डर से लड़ते रहे. और जब 17वें दिन पता चला कि हर खनिक ठीकठाक है तब से इन लोगों ने सबकी सकुशल वापसी की राह एक साथ देखी है. फंसने वालों में सबसे उम्रदराज खनिक 63 साल के मारियो गोमेज की बेटी रोसाना गोमेज कहती हैं, "यह एक खास तरह का रिश्ता है और बहुत मजबूत रिश्ता है. उन लोगों के साथ जिन्हें हम पहले जानते भी नहीं थे. इस रिश्ते को अब छोड़ना बहुत मुश्किल होगा. हालांकि सबको अपनी अपनी जिंदगी दोबारा शुरू करनी है. लेकिन अब हम सब संपर्क में रहेंगे."

यहां से ये लोग सिर्फ अपने अपने लोगों को ही सकुशल घर लेकर नहीं जाएंगे बल्कि कुछ नए रिश्ते भी लेकर जाएंगे जो शायद हमेशा कायम रहेंगे.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः महेश झा

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