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जर्मन चुनाव

आईपीएल विवाद में बढ़ी पवार की मुश्किल

आईपीएल बोली मामले में कृषि मंत्री शरद पवार की मुश्किलें बढ़ रही हैं. पता चला है कि बोली के लिए पवार की कंपनी को बोर्ड की मंजूरी मिली थी. कांग्रेस ने पल्ला झाड़ा.

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बीसीसीआई मुखिया शशांक मनोहर के साथ पवार

पुणे की सिटी कॉर्पोरेशन के बोर्ड ने 31 जनवरी को एक प्रस्ताव पास कर आईपीएल में बोली लगाने को मंजूरी दी थी. सिटी कॉर्पोरेशन में कृषि मंत्री शरद पवार, उनकी पत्नी और बेटी के नाम 16 फीसदी हिस्सेदारी है. बोली लगाने में अपनी भूमिका होने से इनकार कर रहे शरद पवार के लिए इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद अब जवाब देना मुश्किल हो गया है. अब तक पवार और उनकी बेटी कह रहे थे कि उनका आईपीएल की बोली से कोई लेना देना नहीं है और कंपनी के एमडी अनिरुद्ध देशपांडे ने निजी रूप से आईपीएल की बोली में हिस्सा लिया.

हालांकि शरद पवार अब भी यही कह रहे हैं कि अनिरुद्ध देशपांडे कंपनी के तरफ से बोली प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए थे. उनका कहना है कि मार्च में कंपनी बोर्ड ने एक दूसरा प्रस्ताव पारित किया था जिसमें साफ कहा गया कि देशपांडे निजी रूप से आईपीएल की बोली में हिस्सा लें. इस दौरान कंपनी के दूसरे शेयरधारकों को वहां मौजूद नहीं रहने को कहा गया.

उधर कांग्रेस ने कृषि मंत्री को विवादों में घिरता देख उनसे किनारा कर लिया है. कांग्रेस ने कहा है कि शरद पवार को इस मामले में खुद सारी चीजें साफ कर देनी चाहिए. कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि ये मामला बीसीसीआई, शरद पवार और आईपीएल विवाद की जांच से जुड़ा है जिससे पार्टी का कोई लेना देना नहीं. जो भी सवाल हैं वे सीधे पवार से ही पूछे जाने चाहिए.

शरद पवार इसे पहले बीसीसीआई अध्यक्ष थे और पूरा मामला आईपीएल की पुणे टीम के लिए लगी बोली से जुड़ा है. यह टीम सहारा ने खरीदी लेकिन इसके लिए बोली लगाने वालों में सिटी कॉर्पोरेशन के एमडी अनिरुद्ध देशपांडे भी थे.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ एन रंजन

संपादन: ए कुमार

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