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दुनिया

"आईपीएल ज्यादा अहम है या पानी?"

महाराष्ट्र में जहां एक तरफ किसान सूखे से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आईपीएल मैचों के लिए पिच तैयार करने पर 60 लाख लीटर पानी इस्तेमाल करने की योजना है. ऐसे में अदालत ने सवाल किया है कि आईपीएल ज्यादा अहम है या पानी.

सूखे और पानी की कमी के बीच महाराष्ट्र में आईपीएल मैच के आयोजन पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई. हालांकि कोर्ट ने आईपीएल मैचों पर फिलहाल रोक नहीं लगाई है. सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र की स्थिति बहुत ही भयावह है. मराठवाड़ा इलाके में लोग पीने के पानी को तरस रहे हैं. ऐसे में आईपीएल मैचों के लिए पानी बहाना बहुतों को नागवार गुजर रहा है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी स्टेडियम रखरखाव के लिए बहाये जाने वाले पानी को सही नही माना है.

अदालत की फटकार

सूखे के बावजूद पानी की बरबादी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीसीसीआई को फटकार लगाते हुए सवाल किया कि आईपीएल ज्यादा अहम हैं या पानी. एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस वीएम कनाडे और एमएस कार्णिक की खंडपीठ ने राज्य सरकार को भी फटकार लगाई और पूछा, "क्या सरकार राज्य के हालात देख रही है?" खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए पूछा, "आप ऐसे पानी कैसे बर्बाद कर सकते हैं. आपको हालात पता हैं?"

कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार के पास पानी बचाने का कोई उपाय नहीं है, तो मैच को राज्य से बाहर स्थानांतरित कर देना चाहिए. वैसे कोर्ट ने 9 अप्रैल को मुंबई में होने वाले आईपीएल के उद्घाटन मैच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. अदालत ने महाराष्ट्र सरकार से 12 अप्रैल तक जवाब देने को कहा है कि स्टेडियम में पानी की आपूर्ति कहां से होगी. टैंकर लॉबी पर की गई जांच की रिपोर्ट 12 अप्रैल को प्रस्तुत करनी होगी.

बीसीसीआई का रुख

बीसीसीआई आईपीएल के मैच महाराष्ट्र से बाहर स्थानांतरित नहीं करना चाहता. आईपीएल की दो टीमों मुंबई इंडियंस और राइजिंग पुणे के आधे मैच उनके घरेलु मैदान मुंबई एवं पुणे में होंगे. इसके अलावा किंग्स इलेवन पंजाब ने भी तीन मैचों के लिए नागपुर को अपना घरेलु मैदान बनाया है. तय कार्यक्रम के अनुसार दो प्ले ऑफ और फाइनल मुकाबला भी महाराष्ट्र में ही खेला जाना है.

आखिरी समय में बीसीसीआई कार्यक्रम में बदलाव नहीं करना चाहती. खासतौर पर मुंबई से मैच को स्थानांतरित करने से कमाई पर भी असर पड़ेगा. बीसीसीआई ने कोर्ट में अपना बचाव करते हुए कहा कि मैदान के रखरखाव में जो पानी इस्तेमाल किया जाता है, वह पीने लायक नहीं होता. बीसीसीआई का कहना है कि मैदान पर इस्तेमाल होने वाला पानी उसे खरीदना पड़ता है. साथ ही आईपीएल अध्यक्ष राजीव शुक्ला का कहना है कि बीसीसीआई महाराष्ट्र के किसानों के साथ हैं और उनकी हर संभव तरीके से मदद के लिए तैयार हैं.

क्यों हो रहा है विरोध

इन दिनों राज्य भीषण जल संकट से गुजर रहा है. सूखे और पानी की कमी के चलते लाखों किसानों की फसल बर्बाद हो चुकी है. कई जलाशय पूरी तरह से सूख चुके हैं और जिन जलाशयों में थोड़ा बहुत पानी बचा है उनकी निगरानी के लिए पुलिस को लगाना पड़ा है.लातूर में तो धारा 144 लगानी पड़ी है. मराठवाड़ा के कई गांवों में साफ-सफाई, खाना पकाने और दूसरे अन्य कामों के लिए भी पानी नहीं हैं. थाणे और मुंबई से लगे इलाकों में भी पानी की समस्या गंभीर हैं.

एक अनुमान के अनुसार राज्य के तीन स्टेडियम में होने वाले आईपीएल मैचों के दौरान पिचों को तैयार करने में 60 लाख लीटर से ज्यादा पानी का इस्तेमाल किया जाएगा. मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के वकील ने कोर्ट को बताया कि वानखेड़े स्टेडियम में खेले जाने वाले सात आईपीएल मैचों के लिए करीब 40 लाख लीटर पानी का इस्तेमाल किया जाएगा. महाराष्ट्र के कार्यवाहक महाधिवक्ता रोहित देव ने अदालत से कहा कि फिलहाल वानखेड़े स्टेडियम में रोजाना 22,000 लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है लेकिन यह साफ नहीं है कि आखिर क्रिकेट संस्था पिचों के रख-रखाव के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले लाखों लीटर पानी का इंतजाम कैसे करती है.

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