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दुनिया

आईटी में आगे आएं महिलाएं

दुनिया में इंटरनेट कंपनियां शुरू करने वाली महिलाओं की संख्या सिर्फ 10 फीसदी है. ऐप डेवलपमेंट हो या वेबसाइट बनाना, महिलाओं की कमी है. भले ही दुनिया भर में इंटरनेट का बूम हो लेकिन इसमें सिर्फ 14 फीसदी महिलाएं काम करती हैं.

जर्मनी में भारत से आने वाले लोगों में बड़ी संख्या आईटी एक्सपर्टों की है, लेकिन इनमें लड़कियां तुलनात्मक रूप से कम हैं. बर्लिन की कंपनी गेकेटेस ऐसी महिलाओं का एक नेटवर्क बना रहा है जो आईटी कंपनियां चला रही हैं या आईटी एक्सपर्ट हैं. इस नेटवर्क के जरिए दुनिया भर की आईटी कंपनियां ऐसी महिलाओं के लिए बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों नौकरी की संभावनाएं बढ़ेंगी.
जर्मनी के डिजिटल बिजनेस ट्रेड असोसिएशन बिटकॉम के मुताबिक इंटरनेट टेक्नोलॉजी में पिछले पांच साल में ही करीब एक लाख नौकरियां बनी हैं. इनमें से 40,000 नौकरियां अभी भी खाली हैं क्योंकि लोग नहीं मिले.

अमेरिकी उद्यमी जेस एरिकसन इस कमी को खत्म करने की कोशिश कर रही हैं. वह बर्लिन के गेकेटेस की संस्थापक हैं. महिला आईटी एक्सपर्ट का यह नेटवर्क 2013 में शुरू किया गया. बर्लिन में इसके 700 सदस्य हैं साथ ही न्यूयॉर्क और लंदन सहित दुनिया के सात अन्य शहरों में इसकी शाखाएं हैं. एरिकसन ने बताया, "गेकेटेस सांस्कृतिक बदलाव चाहता है. हम चाहते हैं कि महिलाएं कांफ्रेस में आएं और मीडिया से बात करें. हम टेक्नोलॉजी उद्योग में महिलाओं की तगड़ी उपस्थिति चाहते हैं."
नेटवर्क के सदस्य नियमित मिलते हैं. कुछ कोर्स और प्रोग्राम हैं जिनमें अनुभवी महिला उद्यमी नए लोगों को गुर सिखाती हैं. गेकेटेस सामान्य तौर पर पुरुष प्रधान इवेंट्स को महिला केंद्रित तरीके से भी आयोजित करती हैं. इसमें 24 घंटे की प्रोग्रामिंग प्रतियोगिता और हैकेथोन्स भी शामिल हैं.
मजबूत कॉर्पोरेट साझेदार
जुलाई में गेकेटेस ने सॉफ्टवेयर कंपनी एसएपी के साथ हैकेथॉन आयोजित की थी. सैप भी अपने यहां महिलाओं की संख्या बढ़ाना चाहती है. उनका लक्ष्य है 2017 तक कंपनी के प्रबंधन में एक चौथाई महिलाओं को काम देना. सैप में डाइवर्सिटी मैनेडर आंका विटेनबैर्ग का कहना है, "हम युवा महिला टैलेंट को ढूंढना चाहते हैं और उनकी सैप में रुचि पैदा करना चाहते हैं. अगर हम सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में महिलाओं को लाएंगे तो हम और इनोवेटिव हो जाएंगे. मुझे पक्का पता है."
एरिकसन की कोशिश है कि अमेजन और फेसबुक भी गेकेटेस के साथ मिल कर प्रोग्रामिंग प्रतियोगिता आयोजित करें. इसके लिए उन्होंने फेसबुक की मुख्य ऑपरेटिंग ऑफिसर शेरिल सैंडबर्ग से हैम्बर्ग में मुलाकात की. सैंडबर्ग ने उन्हें इस बातचीत के दौरान एक किताब दी, "लीन इनः विमेन, वर्क एंड द विल टू लीड."

महिलाओं की रुचि नहीं
टेक्नोलॉजी क्षेत्र में महिलाओं के कम होने का एक कारण यह भी है कि कंप्यूटर साइंस या फिजिक्स और टेक्नोलॉजी स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियां भी तुलनात्मक रूप से कम हैं. एरिकसन खुद भी तकनीक की एक्सपर्ट नहीं हैं. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंध में स्नातक करने के बाद स्नातकोत्तर उपाधि मीडिया और संचार में ली.
धीरे धीरे आईटी में भी महिलाओं की संख्या बढ़ रही है. इन नौकरियों में 40 से 45 हजार यूरो की सालाना तनख्वाह के साथ आगे बढ़ने की संभावनाएं काफी हैं. जर्मनी में वैसे भी तकनीकी नौकरियों के लिए क्वालिफाइड लोगों की कमी है. इसलिए महिलाओं के लिए जर्मनी और आईटी दोनों ही रास्ते खुले हैं.
रिपोर्टः नील्स यास्पर सिमरमन/एएम
संपादनः अनवर जे अशरफ

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