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दुनिया

आईएस से शुरू किया अफगानिस्तान में रेडियो

तालिबान ने शुरुआती सालों से ही अफगानिस्तान की नाक में दम किया हुआ है. अब इस्लामिक स्टेट भी वहां अपने पैर पसार रहा है और देश की मुश्किलें बढ़ा रहा है. आईएस ने अपना रेडियो प्रसारण शुरू किया है.

यह रेडियो प्रसारण नंगरहार प्रांत में सुना जा सकता है, जहां इस्लामिक स्टेट धीरे धीरे कब्जा जमा रहा है. 90 मिनट के इस प्रसारण को "खिलाफत की आवाज" का नाम दिया गया है. यह प्रसारण स्थानीय भाषा पश्तो में किया जाता है और इसमें कई इंटरव्यू, संदेश और ऐसे गीत चलाए जाते हैं, जिनके जरिये लोगों को इस्लामिक स्टेट से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके.

नंगरहार के प्रोविंशियल काउंसिल के अध्यक्ष अहमद अली हजरत ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "हमारे यहां अधिकतर लोग बेरोजगार हैं और यह रेडियो प्रसारण उनमें से बहुतों को आईएस से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा." आईएस को दाएश के नाम से पुकारते हुए उन्होंने कहा, "दाएश अब जलालाबाद से केवल सात किलोमीटर ही दूर है और अगर सरकार ने जल्द ही कुछ नहीं किया, तो वह अपने प्रसारण का इलाका बढ़ा लेगा और फिर काबुल से भी लोगों को भर्ती करने लगेगा."

एक प्रसारण के दौरान आईएस के सदस्य ने कहा कि रेडियो कार्यक्रम का मकसद "पश्चिम द्वारा बनाई गयी नकारात्मक छवि" को बदलना है. शफक नाम से पहचाने जाने वाले इस व्यक्ति ने कहा, "हमें बदनाम करने के लिए बहुत सी कोशिशें की जा रही हैं. ये जो लिपस्टिक वाली नई पीढ़ी है, ये युवा, जो शेव करते हैं और ऐसे कपड़े पहनते हैं, जिनसे पता ही नहीं चलता कि वे मर्द हैं या जनाना, वे ही हमारे खिलाफ प्रचार करने में लगे हैं."

फिलहाल आईएस अफगानिस्तान में बहुत मजबूत नहीं है. वहां आईएस के कितने सदस्य मौजूद हैं और किन किन इलाकों में वे फैले हैं, इस पर कोई ठोस जानकारी मौजूद नहीं है. सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक पूर्व तालिबानी ही अब आईएस का रुख कर रहे हैं. पिछले सप्ताह अफगानिस्तान में मौजूद अमेरिकी सेना के कमांडर जनरल जॉन कैम्पबैल ने कहा कि देश में 1,000 से 3,000 के बीच लोग आईएस से जुड़ चुके हैं और "अगर जल्द ही इनके खिलाफ कदम नहीं उठाया गया, तो यह संख्या बढ़ती रहेगी."

नंगरहार में अधिकारी अब तक इस प्रसारण पर रोक लगाने में असमर्थ रहे हैं. उनका कहना है कि आईएस के बार बार भेस बदलते रहने के कारण, वे इस बारे में कुछ नहीं कर पा रहे हैं. नंगरहार के राज्यपाल के प्रवक्ता अताउल्लाह खोग्यानी ने बताया, "वे एक जगह से दूसरी जगह जाते रहते हैं. इस कारण हमारे लिए उनका पता करना काफी मुश्किल हो जाता है."

आईबी/एसएफ (रॉयटर्स)

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