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दुनिया

आईएस से जुड़ने के लिए खुद गायब हुई जर्मन किशोरी?

जर्मनी में जांचकर्ता पता लगाना चाहते हैं कि क्या 2016 में गायब हुई 16 साल की जर्मन लड़की उन 20 लोगों में शामिल है, जिन्हें इराकी शहर मोसुल की एक सुरंग से बरामद किया गया है. गिरफ्तार हुए लोगों में पांच जर्मन नागरिक हैं.

जर्मन शहर ड्रेसडेन के पास पुल्सनित्स की रहने वाली एक किशोरी ने 2016 में पहले तो धर्म परिवर्तन कर इस्लाम स्वीकार किया और फिर अचानक लापता हो गयी. माना जा रहा है कि इसके पहले से वह कट्टरपंथी आतंकी गुट इस्लामिक स्टेट के संपर्क में थी. लड़की की गुमशुदगी की जांच कर रहे जांचकर्ताओं को उसके कुछ ऑनलाइन चैट फोरमों में सक्रिय होने के सबूत मिले थे, जहां आईएस के सूत्रों से बात होती थी.

अब लगभग एक साल बाद जर्मन जांचकर्ताओं को उसका एक सुराग मिला है. एक हफ्ते पहले ही इराकी शहर मोसुल के पुराने हिस्से के नीचे खुदी एक सुंरग में इस्लामिक स्टेट के 20 लड़ाके मिले हैं. उनमें से एक की पहचान इस जर्मन लड़की से मिलती जुलती मानी जा रही है.

जर्मन अखबार डी वेल्ट ने रिपोर्ट प्रकाशित की है कि गायब होने से पहले भी जर्मन प्रशासन इस लड़की की जांच कर रहा था. उन्हें शक था कि वह राज्य के खिलाफ कोई हिंसक कार्रवाई करने की तैयारी कर सकती है. लेकिन इस जांच के बीच ही वह किशोरी गायब हो गयी.

इराक के आतंकवाद-रोधी दस्ते के एक अधिकारी हैदर अल-अराजी ने इस बात से इनकार किया है कि मोसुल में गिरफ्तार हुई महिला लड़ाकों में यह 16 साल की लड़की भी है. उन्होंने बताया कि वे सब लड़ाके "आत्मघाती हमलावर महिलाएं थीं जो स्टैंड बाई पर थीं, और इराकी सेना को उड़ाने के लिए तैयार थीं."

अल-अराजी ने बताया कि इन लड़ाकों ने उत्तरी सीरिया के अल-रक्का प्रांत से इराक में प्रवेश किया. इन लोगों में कुछ ने पहले पुलिस की नौकरी की और फिर बाद में वे उन इराकी महिलाओं को पकड़ती थीं जो इस्लामिक कानून या शरिया कानून को तोड़ती थीं. इन सब गिरफ्तार लड़ाकों की जांच हो रही है. इनके पास से कई हथियार और विस्फोटक बेल्ट मिलीं.

इस समूह में पांच जर्मन, तीन रूसी, तीन तुर्की और दो कनाडाई नागरिक हैं. जर्मनी के ड्रेसडेन में वरिष्ठ जांचकर्ता लोरेंत्स हासे ने कहा है कि एक बार उस किशोरी को "पक्के तौर पर पहचान लिया जाता है" तब "नये सबूतों की समीक्षा होगी" और उसकी जांच फिर से शुरू होगी.

करीब तीन साल बाद इराकी सेना ने मोसुल पर कब्जा कर लिया है. इस बार यह ऑपरेशन आठ महीने लंबा चला. यह आतंकी गुट आईएस के खिलाफ इराक की आज तक की सबसे बड़ी जीत है.

आरपी/एनआर (डीपीए)

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