आईएस को टक्कर देता विदेशी लड़ाका | दुनिया | DW | 16.10.2014
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दुनिया

आईएस को टक्कर देता विदेशी लड़ाका

योहान कोसर जैसे विदेशी लड़ाकों के बारे में कम ही सुनने को मिलता है. जिहाद के लिए जान देने के बजाए वह अपनी मातृभूमि को बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. वह इस्लामिक स्टेट से तब तक लड़ना चाहते हैं जब तक वह जड़ से न खत्म हो जाए.

"यह बकवास है. जो भी ऐसा कुछ कह रहा है, उसे अगली छुट्टियां सीरिया में बितानी चाहिए और देखना चाहिए कि हम क्या कर रहे हैं", यह कहना है कोसर का. कोसर कुछ ऑनलाइन कमेंट पढ़ कर ये सब कह रहे हैं. टिप्पणियों में लिखा गया है कि जब वह घर लौटेंगे तो वह लोगों को मारना सीख चुके होंगे. कोसर सीरियैक मिलिट्री काउंसिल (एमएसएफ) में स्विस बटालियन के कमांडर हैं. यह एक ऐसा विद्रोही गुट है जो इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ रहा है. वह कहते हैं, "मैंने स्विट्जरलैंड के खिलाफ कुछ नहीं किया है और मुझे पूरा विश्वास है कि स्विस ये समझ सकेंगे."

डी़डबल्यू ने जिस समय स्विस सेना के इस पूर्व सार्जेंट से इंटरव्यू किया, वह सैनिक यूनिफॉर्म में थे. उनके माथे पर एक कपड़ा बंधा हुआ था और वह पहाड़ी पर बने एक टेंट में बैठे थे, जहां से एक किलोमीटर की दूरी से इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों को देखा जा सकता था और दूसरी ओर 10 किलोमीटर दूर कुर्द शहर कामिशी भी. जिस पहाड़ी पर वह थे वहां कई कब्रें थी जिनके ऊपर रेत से भरे थैले रख गोलियों से बचाव किया जा रहा था. कई कब्रों पर गोलियों के निशान भी थे.

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एक कब्र को बिस्तर बना दिया गया है. इसमें एक हल्की गद्दी और चादर बिछी है. यहां गार्ड की ड्यूटी खत्म होने के बाद ये लोग दिन में कुछ घंटे की नींद ले सकते हैं. एक और कब्र को इंटरनेट रूम बना दिया गया है. केवल इसी जगह पर फोन नेटवर्क आता है.

स्विट्जरलैंड से सीरिया

कोसर स्विट्जरलैंड के पूर्वोत्तर में सेंट गालेन में पैदा हुए. अपनी जवानी में वह दक्षिणी जिले टिसिनो में रहे. वह सीरियैक मूल के हैं, और उनके माता पिता इलाके की सबसे पुराने ईसाई समुदाय के हैं. कोसर बताते हैं कि वह सीरिया लड़ने के लिए नहीं आए, "मैंने देखा कि मैं मदद कर सकता हूं इसलिए मैंने लोगों को टिप्स देने शुरू किए कि कैसे हथियार इस्तेमाल करें और कैसे सुरक्षा चौकी बनाएं. हम में से किसी को युद्ध या हथियार अच्छे नहीं लगते."

उन्होंने जोर दिया कि वह सिर्फ उन गांवों और कस्बों की सुरक्षा कर रहे थे जहां आईएस के कट्टरपंथी युवा और बूढ़े लोगों का सिर कलम करने पहुंचे. उन्होंने बताया, "सीरियैक मिलिट्री काउंसिल सीरिया में एसिरियन मूल के लोगों की पहचान बचाने के लिए बनाई थी. हम सिर्फ अल्पसंख्यक नहीं हैं, न तो यहां और न ही विदेश में. हम लोग हैं और हमारी यहां जड़ें हैं."

सीरियैक मिलिट्री काउंसिल की स्थापना 2013 की शुरुआत में सुतोरो के सैन्य धड़े के तौर पर की गई. यह सिरियैक क्रिश्चन मिलिशिया है जो सेना (लड़ाकों) की तरह पूर्वोत्तर सीरिया के तीन स्वघोषित स्वायत्त इलाकों में काम कर रहा है. सुतोरो तीन प्रांतो, सिजिरे, कोबानी और एफ्रीन की सुरक्षा करता है जबकि कुछ सौ लोगों वाला एमएसएफ पीपल्स प्रोटेक्शन यूनिट (वायपीजी) से जुड़ा है और इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ रहा है.

कोसर को नहीं लगता कि वायपीजी का कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) से संबंध होना कुछ गलता है क्योंकि वह लोकतंत्र, आजादी और इंसानियत की रक्षा करते हैं. पीकेके को अमेरिका और यूरोपीय संघ में आतंकी संगठन का दर्जा दिया गया है.

पहाड़ों की याद आती है

वह कहते हैं कि भले ही उनके पास सिर्फ कुछ सौ ही लोग (उन्होंने ठोस आंकड़ा नहीं बताया) और हल्के हथियार हों, फिर भी उनका कोई आदमी अभी मारा नहीं गया है, "हमने किसी को नहीं खोया. हमें अतिरिक्त लड़ाकों की जरूरत भी नहीं. कुर्दों को 40 साल लड़ाई का अनुभव है. हम सिर्फ दो ही साल से हैं. हमारी ट्रेनिंग उनसे कहीं आधुनिक है." अपने सैन्य अनुभव के लिए उन्होंने स्विट्जरलैंड को धन्यवाद देते हुए जोर दिया कि उन्हें और हथियारों की जरूरत है.

कोसर ने एक ऐसे आधुनिक हथियार के बारे में बताया जिसकी कल्पना करना मुश्किल था. उन्होंने कहा कि सितंबर में तेल हामिस को लड़ाकों के कब्जे से छुड़ाने का जो अभियान शुरू हुआ था उसमें दुश्मन के इलाके में घने अंधेरे में जाना शामिल था और कुछ ही मीटर की दूरी से गोलीबारी करने की योजना थी. धूल में सने कोसर ने जब इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों की फ्रंट लाइन दूर देखी तो उन्होंने अपनी आंखे पोंछते हुए कहा कि वह महीनों से नहीं सोए हैं. अपने देश को याद करते हुए उन्होंने कहा, "क्या मैं स्विट्जरलैंड को मिस करता हूं, हां बिलकुल करता हूं. मुझे पहाड़ों की याद आती है."

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