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दुनिया

आईएस के चंगुल से भागी यजीदी किशोरी की आपबीती

सोलह साल की निहाद को तथाकथित इस्लामिक स्टेट के लड़ाके अगवा करके ले गए और उसके साथ महीनों बलात्कार करते रहे. जब जान बचाकर भागने की घड़ी आई तो उसे अपने बच्चे से भी बिछड़ना पड़ा.

अपने अपहरणकर्ताओं से जान छुड़ाने वाली यजीदी लड़की निहाद ने लंदन में एक सम्मेलन में बोलते हुए अपील की है कि उसके जैसी अन्य यजीदी लड़कियां, जो अब भी इस्लामिक स्टेट के चंगुल में हैं, जो जुल्म, बलात्कार और हिंसा की शिकार हो रही हैं, उनकी मदद की जाए. निहाद ब्रिटिश चैरिटी संस्था अमार के सम्मेलन में बोल रही थी, जिसका आयोजन मध्यपूर्व में शरणार्थियों और विस्थापित हुए लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर गौर करने के लिए किया गया था.

दर्दनाक आपबीती

जिहादी निहाद के साथ करीब 300 परिवारों के सदस्यों को अपने साथ इराक सीरिया बॉर्डर पर स्थित सीरियाई इलाके हस्साके ले गए. "रात में उन्होंने औरतों को मर्दों से अलग कर दिया. उन्होंने आकर कहा, या तो तुम मुसलमान हो जाओ या फिर हम मर्दों की हत्या कर देंगे." उसने बताया कि इसके बाद इराक वापस लाकर उन्होंने लड़कियों को अलग किया और उन्हें शादी के लिए मोसुल के एक जिम में ले गए. इनकार करने पर दो हफ्ते तक वे उनकी पिटाई करते रहे.

इसके बाद उनका एक स्थानीय सरदार अपने कुछ अन्य साथियों के साथ आया. निहाद ने बताया, "उन्होंने 21 लड़कियों को छांट कर अलग किया उन्हें एक अलग कमरे में ले गए और बलात्कार शुरू कर दिए." उसे एक 25 वर्षीय जिहादी सलाम ने चुना. इसके बाद वह उसे अपने घर ले गया जहां पहले से उसकी गर्भवती पत्नी और उनका एक बेटा था. यौन उत्पीड़न आगे जारी रहा. उसकी पत्नी का व्यवहार अच्छा नहीं था, उसका कहना था कि निहाद उसके घर और उसकी जिंदगी में घुस आई है.

करीब डेढ़ महीने बाद सलाम सीरिया में मारा गया. इसके बाद निहाद ने भागने की कोशिश की लेकिन किरकुक में फिर पकड़ी गई, यहां से उसे मोसुल ले जाया गया. उसे चार बेटियों के बाप को सौंप दिया गया. वह भी उसके साथ बलात्कार करता रहा. बाद में निहाद को पता चला कि वह गर्भवती है. उसने अकेले में गर्भ गिराने की भी कोशिश की लेकिन नाकाम रही. उसे शादी के प्रस्ताव भी दिए गए लेकिन वह नहीं मानी और अंतत: बेटे को जन्म दिया.

उसने मताया, "मैं उसे यजीदी नाम देना चाहती थी लेकिन उसके बाप ने उसका नाम ईसा रखा." तीन महीने बाद वह एक पड़ोसी की मदद से अपने भाई को फोन करने और वहां से भाग निकलने में कामयाब रही. लेकिन बिना ईसा के. ईसा को याद कर वह फूट फूट कर रो पड़ती है, "मैं पढ़ाई पूरी करना चाहूंगी. मैं अंग्रेजी पढ़ना चाहती हूं और शादी कर घर बसाना चाहती हूं."

मदद की गुहार

निहाद बकारत ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "यह जीवन नहीं है. हम तब तक जिंदा नहीं महसूस कर सकते जब तक हमारे बाकी लोग दाएश से नहीं छुड़ा लिए जाते." इस्लामिक स्टेट संगठन को अरबी भाषा में दाएश नाम से भी पुकारा जाता है. निहाद को उसके परिवार के 28 सदस्यों के साथ अगस्त 2014 में इराक के सिंजार प्रांत से अगवा कर लिया गया था. इस दौरान हमलों में इस्लामिक स्टेट ने यजीदियों को विधर्मी बताते हुए भारी नुकसान पहुंचाया. एक घंटे की बातचीत में कभी अपने घुटनों को जकड़ते हुए तो कभी घबराहट में रोते हुए निहाद ने बताया कि उसकी दो बहनें और 12 भाई अभी भी जिहादियों के चंगुल में हैं.

चैरिटी संस्था की अध्यक्ष बैरोनेस एमा निकोलसन ने विस्थापित हुए लोगों की "मनेचिकित्सकीय मदद की बड़ी जरूरत और शारीरिक मदद" की बात की. इस्लामिक स्टेट के कट्टरपंथियों के हाथों बीते सालों में हजारों की संख्या में लोगों का अपहरण और हत्याएं हुई हैं. बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं. निहाद ने बताया कुछ लोगों की जान यूं बच गई कि जब चेकपोस्ट पर गाड़ियों को रोका गए तो वे लोग जान बचाकर पहाड़डियों में छुप गए.

एसएफ/आरपी (एएफपी)

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