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दुनिया

आईएमएफ में भारत की हिस्सेदारी बढ़ी

जी 20 देशों की बैठक में हुई सहमति के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत की स्थिति पहले से बेहतर हो जाएगी. तीन पायदान ऊपर चढ़कर भारत 8वें नंबर पर पहुंच जाएगा. चीन को भी फायदा. तीसरे नंबर पर काबिज होगा.

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दुनिया के 20 बड़े देशों के संगठन जी-20 में कई दूसरे मुद्दों पर भी खुल कर चर्चा हुई. हालांकि फिलहाल जो बदलाव देखने को मिले उनमें सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बंटवारे को लेकर ही है. जी-20 के बैठक में उभरते बाजार वाले विकासशील देशों को आईएमएफ में ज्यादा महत्व देने की कवायद के तहत चीन और भारत की हिस्सेदारी बढ़ाई गई है. भारत का हिस्सा 2.44 फीसदी से बढ़ कर 2.75 फीसदी हो जाएगा और इस तरह वह आठवें नंबर पर पहुंच जाएगा. उधर चीन की हिस्सेदारी भी बढ़ाई गई है और वह तीसरे नंबर पर पहुंच जाएगा.

भारतीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि आईएमएफ के कोटे में सुधार की प्रक्रिया दुनिया के बदलते आर्थिक परिदृश्य के हिसाब से किया गया है और अब यह ज्यादा संतुलित है. भारत और दूसरे विकासशील देश दुनिया की अर्थव्यवस्था में ज्यादा योगदान के आधार पर आईएमएफ में ज्यादा अधिकार की मांग लंबे समय से कर रहे हैं.

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खरीदारी की क्षमता के आधार पर उभरती आर्थिक शक्तियों का दुनिया की अर्थव्यवस्था में योगदान 47.5 फीसदी है जबकि आईएमएफ में उनकी हिस्सेदारी केवल 39.5 फीसदी है. नई व्यवस्था लागू हो जाने के बाद 187 सदस्य देशों वाले आईएमएफ में विकासशील देशों का हिस्सा बढ़ कर 45.5 फीसदी हो जाएगा. आईएमएफ के 24 सदस्यों वाले कार्यकारी बोर्ड में भी बदलाव होगा. नए करार के मुताबिक यूरोप अपने हिस्से की दो सीटें छोड़ने पर रजामंद हो गया है.


मुद्रा अवमूल्यन से चिंतित अमेरिका

उधर अमेरिका के वित्त मंत्री टिमोथी गाइथनर ने विकासशील देशों से उनकी मुद्राओं की कीमत बढ़ने की राह से बाधाएं हटाने को कहा है. गाइथनर ने इन देशों से विकास के लिए बढ़ती स्थानीय मांग को सहारा बनाने और निर्यात पर निर्भरता को कम करने की मांग की है.

चीन का नाम लिए बगैर टिमोथी ने कहा कि मुद्राओं को जान बूझ कर कमजोर करने की नीति दुनिया में विकास की तस्वीर असंतुलित बना रही है. जी 20 के वित्त मंत्रियों की बैठक के बाद टिमोथी ने कहा, "अगर दुनिया की अर्थव्यवस्था को तेजी और मजबूती से आगे बढ़ना है तो संकट से निकलने के साथ ही हमें विकास का संतुलित तरीका अपनाना होगा." अमेरिकी वित्त मंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि अमेरिका डॉलर को मजबूत बनाए रखेगा. उन्होंने इस बात से इनकार किया कि डॉलर के अवमूल्यन के लिए कोई नीति बनाई जा रही है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः वी कुमार

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