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दुनिया

आईएमएफ का विकास दर बढ़ाने पर जोर

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष अर्थव्यवस्था को मंदी से बचाने के लिए जरूरत पड़ने पर कर्ज लेकर भी निवेश करने की मांग कर रहा है. लेकिन जर्मन वित्त मंत्री वोल्फगांग शॉएब्ले ने इस तरह के कदमों की सफलता पर संदेह व्यक्त किया है.

वॉशिंगटन में दुनिया की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की बैठक हुई है जिसमें अमेरिका, जापान और जर्मनी जैसे विकसित देश हैं तो चीन, ब्राजील और भारत जैसे विकासशील देश भी. उनकी बैठक ऐसे समय में हुई है जब यूरोप से आर्थिक विकास की धुंधली तस्वीरें उभर रही हैं. खतरा इस बात का है कि यूरो मुद्रा के प्रचलन वाले 18 देश फिर से मंदी के शिकार हो सकते हैं. जर्मनी ने गुरुवार को कहा है कि निर्यात में पिछले पांच साल में सबसे बड़ी गिरावट आई है. इससे पहले यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में औद्योगिक उत्पादन कम होने, कारखानों के ऑर्डरों में कमी और कारोबारी भरोसे में ह्रास की खबर आई थी.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की बैठक से पहले जारी रिपोर्ट में यूरोप के मंदी में जाने की आशंका व्यक्त की गई है. जापान, चीन और ब्राजील में भी कमजोरियों की वजह से विकासदर धीमी हो रही है. मुद्रा कोष ने विश्व अर्थव्यवस्था के विकास को असंतुलित बताते हुए कहा है कि इस साल वैश्विक विकास 3.3 प्रतिशत रहेगा. कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री ईश्वर प्रसाद ने कहा है, "दुनिया अभी भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की गाड़ी पर सवारी करने की उम्मीद कर रही है."

Symbolbild deutsche Exporte EU

यूरोप को निर्यात

नए निवेश की मांगों के बीच जर्मन वित्त मंत्री वोल्फगांग शॉएब्ले बजट अनुशासन की अपनी नीति पर कायम है. उनका कहना है, "यह व्यक्तिगत गुरूर या महत्वाकांक्षा का सवाल नहीं है. यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं में टिकाऊ विकास की सबसे महत्वपूर्ण शर्त भरोसा है." जर्मनी ने यह भरोसा अपनी ठोस बजट नीति के चलते 2008 के वित्तीय संकट के बाद फिर से जीता है. शॉएब्ले का कहना है, "हमारी बेवकूफी होगी कि हम इसे अभी खतरे में डालें." वे कहते हैं कि सरकारी खर्च बढ़ाकर मांग तैयार करने से ज्यादा फायदा नहीं होगा.

यूरोप में इटली के प्रधानमंत्री मातेओ रेंजी और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद आर्थिक विकास के लिए सरकारी खर्च में कटौती को टालने की मांग कर रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा संघ की अध्यक्ष क्रिस्टीने लागार्द भी सरकारी निवेश बढ़ाने की मांग कर रही हैं, क्योंकि उनके विचार में बहुत से देशों में अर्थव्यवस्था के विकास की दर मामूली है. अपनी ताजा रिपोर्ट में मुद्रा कोष ने जर्मनी से परिवहन संरचना में सरकारी खर्च बढ़ाकर विकास को बढ़ावा देने की मांग की है. शॉएब्ले निवेश के विरुद्ध नहीं हैं, जबतक उसके लिए कर्ज न लिया जाए.

इस साल जी-20 देशों की अध्यक्षता कर रहा ऑस्ट्रेलिया कम से कम 2 फीसदी वैश्विक आर्थिक विकास के लक्ष्य वाला एक्शन प्लान तय करना चाहता है. इसका मतलब अगले पांच साल की अवधि में 20 खरब डॉलर का अतिरिक्त उत्पादन होगा. ऑस्ट्रेलिया के वित्त मंत्री जो हॉकी का कहना है कि यह लक्ष्य महत्वाकांक्षी है लेकिन पूरा करने लायक है. इसका मतलब लाखों लोगों के लिए रोजगार होगा, क्योंकि इस योजना का आधार ढांचागत संरचना पर निवेश में वृद्धि है. यह योजना नवम्बर में ब्रिसबेन में होने वाली जी-20 शिखर भेंट में हस्ताक्षर के लिए पेश की जाएगी.

एमजे/आरआर (डीपीए, एएफपी)

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