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दुनिया

आंसुओं के साथ आक्रोश

अपने इतिहास की सबसे बुरी खदान दुर्घटना देखने वाले तुर्की में सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं. 282 लोगों की मौत के बाद श्रम संगठनों ने एक दिन की हड़ताल बुलाई है. खदान सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री निशाने पर हैं.

तुर्की की सबसे बड़ी ट्रेड यूनियन पब्लिक वर्कर्स यूनियंस कंफेडेरशन ने हड़ताल का आह्वान करते हुए कहा, "जो लोग निजीकरण के साथ, नीतियों के साथ हैं वे कम कीमत के चक्कर में कर्मचारियों की जान जोखिम में डाल रहे हैं, ऐसे ही लोग सोमा नरसंहार के दोषी है और इसकी जिम्मेदारी उन्हीं पर आनी चाहिए."

बढ़ते आक्रोश के बीच सोमा की कोयला खदान में फंसे बाकी खनिजों के जीवित बचने की उम्मीदें भी धूमिल होती जा रही हैं. बुधवार को राजधानी अंकारा और सबसे बड़े शहर इस्तांबुल में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए. नाराज लोगों ने सरकार और खनन उद्योग पर लापरवाही का आरोप लगाया. प्रधानमंत्री रेचेप तैयब एर्दोवान ने विश्वसनीय जांच का भरोसा दिया है. प्रधानमंत्री ने कहा, "हम अपने मौजूदा इतिहास की सबसे बड़ी कामकाज संबंधी दुर्घटना के गवाह हैं."

Türkei Explosion in Bergwerk Trauer

कब्रिस्तान में मृतकों के मायूस परिजन

एर्दोवान ने लापरवाही के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि "ऐसी दुर्घटनाएं हो जाती हैं." उन्होंने 1862 और 1864 में इंग्लैंड में हुई इससे भी बड़ी दुर्घटनाओं का हवाला दिया. हालांकि उनके इस बयान ने गुस्से में उबाल लाने का काम किया. अंकारा में तीन से चार हजार लोग सड़कों पर उतर आए. उनके खिलाफ पुलिस ने आंसू गैस और घायल करने वाली पानी की बौछार का इस्तेमाल किया. इस्तांबुल में भी प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया. मृतकों के कई परिजन एर्दोवान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.

माना जा रहा है कि 90 खनिज अब भी खदान में फंसे हुए हैं. खदान में मंगलवार को धमाका हुआ और आग लग गई. आग तो बुझा दी गई लेकिन खदान में जहरीला धुआं भर गया. ज्यादातर मौतें कॉर्बन मोनोक्साइड से दम घुटने के कारण हुईं. बुधवार को आई रिपोर्टों में कहा गया कि हादसे के वक्त खदान में 787 कर्मचारी थे. हालांकि बाद में इस संख्या को 450 बताया गया. बचाव कार्य में जुटे डॉक्टर एरडेम बाकिन के मुताबिक ट्रांसफॉर्मर और मुख्य गेट के बीच काम कर रहे 70-80 लोग ही जान बचा पाए हैं, "जो लोग इसके पीछे थे, वो आग की चपेट में आए और सभी की मौत हो गई."

माना जा रहा है कि हादसा इलेक्ट्रिक फॉल्ट की वजह से हुआ. राहतकर्मियों ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है.

ओएसजे/एमजी (एएफपी, रॉयटर्स)

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