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दुनिया

अफ़ग़ानिस्तान में कड़ी लड़ाई से सामना: पैट्रेयस

पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में नाटो के ठिकाने पर तालिबान के हमले के बीच वाशिंग्टन में फिर से अफ़ग़ानिस्तान रणनीति पर चर्चा शुरू हो गई है. सीनेट में नवनियुक्त कमांडर डेविड पेट्रेयस की पुष्टि के लिए कार्वाई शुरू हुई है.

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डेविड पैट्रेयस

जलालाबाद में नाटो के सैनिक ठिकानों पर तालिबान के दिनदहाड़े बेधड़क हमले ने एक बार फिर यह बात साफ़ कर दी है कि अफ़ग़ानिस्तान में नौ वर्षों से जारी लड़ाई में तेज़ी से किसी पलटाव की उम्मीद नहीं की जा सकती. इस युद्ध का संचालन करने के लिए राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा नामज़द नए कमांडर जनरल डेविड पैट्रेयस ने मंगलवार को अपनी नियुक्ति की पुष्टि के लिए हुई सुनवाई में अमरीकी सांसदों को आगाह किया कि यह मान लेना ग़लत होगा कि उनकी जो रणनीति इराक़ में कारगर हुई है, वही अफ़ग़ानिस्तान में भी सफल होगी.

सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति में बोलते हुए पैट्रेयस ने कहा कि यह लड़ाई इरादों का संघर्ष है, जिसमें तालिबान का उद्देश्य पश्चिमी देशों के संकल्प को कमज़ोर करना है, "मेरा अनुमान है कि कड़ी लड़ाई जारी रहेगी. दरअसल, अगले कुछ महीनों में वह और तेज़ हो सकती है. जैसे-जैसे हम दुश्मन की पनाहगाहों को समाप्त करेंगे और उसे कार्रवाइयां करने की उसकी आज़ादी से वंचित करेंगे, विद्रोही जवाबी लड़ाई लड़ेंगे."

इस स्थिति को देखते हुए अमरीकी सैनिकों की वापसी की ओबामा द्वारा तय जुलाई, 2011 की समयसीमा का पालन करना कितना मुश्किल होगा, इसके आसार स्पष्ट हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि एक वर्ष का समय अफ़ग़ानिस्तान में जारी समस्याओं से पार पाने के लिए काफ़ी नहीं है. स्वयं पैट्रेयस ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि ओबामा की समयसीमा वापसी के क़दमों की शुरुआत होगी, समापन नहीं, "राष्ट्रपति की हाल के दिनों की इस याददिहानी की ओर ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि जुलाई  2011 की तारीख़ प्रक्रिया की शुरुआत होगी, वह तारीख़ नहीं, जब अमरीका बस, बाहर जाने वाले दरवाज़ों की दिशा में रवाना हो जाएगा और बत्तियां बुझा देगा."

पैट्रेयस ने यह भी कहा कि दिसंबर में व्हाइट हाउस द्वारा किए जाने वाले पुनर्विचार के नतीजे में रणनीति में व्यापक तब्दीलियां की जा सकती हैं. जनरल पैट्रेयस ने कहा कि ओबामा द्वारा 30,000 और सैनिक भेजे जाने की स्वीकृति के परिणाम में तालिबान ने दबाव महसूस करना शुरु किया है, लेकिन पैट्रेयस ने आगाह किया कि विद्रोहियों में अब भी लचीलेपन की क्षमता बनी हुई है.

पैट्रेयस ने ओबामा के इस कथन की ओर ध्यान दिलाया कि अमरीका को आने वाले एक लंबे समय तक अफ़ग़ानिस्तान को सहायता जारी रखनी होगी. ज़ाहिर है कि तालिबानी द्वारा जलालाबाद में आज किया गया हमला इस आवश्यकता को रेखांकित करता है.

यह महीना हताहतों की संख्या की दृष्टि से अफ़ग़ानिस्तान में गठजोड़ सेना के लिए अब तक का सबसे बुरा महीना रहा है, जिसके 100 से अधिक सैनिकों की जानें गई हैं. अकेले अमरीका के कोई 400 सैनिक इस महीने ज़ख़्मी हुए हैं. लेकिन पैट्रेयस ने, जिनकी नियुक्ति की इस सप्ताह डैमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के समर्थन से पूरी सीनेट द्वारा पुष्टि कर दिए जाने की संभावना है, कॉंग्रेस को आश्वासन दिया कि गठजोड़ सेना ने युद्ध के कई मोर्चों पर प्रगति की है, हालांकि आगे सामना कड़ी लड़ाई से है.

जनरल पैट्रेयस ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में प्रगति उम्मीद से धीमी है और अफ़ग़ान सुरक्षा सैनिकों को प्रशिक्षित करने का काम एक चुनौती बना हुआ है, जो अफ़ग़ानिस्तान को सुरक्षा की दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण क़ाम है. जनरल पैट्रेयस अगले सप्ताहांत अफ़ग़ानिस्तान जाएंगे.

रिपोर्ट: गुलशन मधुर, वाशिंग्टन

संपादन: महेश झा

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